पांगी :
एक पल में 13 घर उजड़ गए। चीखें, पत्थर और मौत… और बीच में बच गया एक शख्स।
40 वर्षीय विकर सिंह – पांगी के किलाड़ में कपड़े की छोटी सी दुकान चलाने वाले। कड़ू नाले में हुए इस दर्दनाक हादसे में गाड़ी में सवार 14 में से सिर्फ वही जिंदा बचे।
उनकी आवाज आज भी कांप रही है।
“पहाड़ गिरते देखे थे, मुझ पर गिरेगा सोचा नहीं था”
विकर सिंह कहते हैं, “मैं पांगी के पहाड़ों में पैदा हुआ और यहीं बड़ा हुआ। पहाड़ गिरते हुए देखे हैं। लेकिन यह नहीं सोचा था कि एक दिन पहाड़ मुझ पर गिरने लगेगा और रास्ते पर पड़े पत्थर मुझे बचा लेंगे।”
“मैं बच गया हूं… इस बात पर अब तक यकीन नहीं हो रहा। समझ नहीं आ रहा कि मैं अपनी मां, पत्नी और दो बेटियों के लिए बचा हूं या इस मौत का मंजर आपके साथ साझा करने के लिए।”
आंखों देखी मौत
वह कुल्लू से घर और दुकान का सामान लेकर लौट रहे थे। BRO इस मार्ग पर ब्लास्टिंग कर रहा था। तिंदी में वाहन रोक दिए गए थे।

“मैं सूमो में बैठा था। दूसरी तरफ से गाड़ियां आ रही थीं। हमारी तरफ की गाड़ियां खड़ी थीं तो मैं बाहर निकला कि देखूं क्या चल रहा है। सड़क पर पड़ा पत्थर हटाने लगा। तभी सब गाड़ी में बैठ चुके थे। अचानक जोर की आवाज आई… किसी ने चिल्लाकर कहा चट्टान गिरी, सूमो दब गई।”
“उसके बाद मैंने सिर्फ एक बार पीछे मुड़कर देखा… वो दृश्य मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा।”
13 जिंदगियां, एक भी सांस नहीं
पहाड़ से एकाएक मौत बरस पड़ी। गाड़ी में बैठे लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। मासूम बच्चों समेत 13 लोग चट्टानों के नीचे दब गए।
विकर बताते हैं, “मैं किलाड़ की तरफ भागा। पैर कांप रहे थे, सांस सूख रही थी। बच्चियों का चेहरा आंखों के सामने घूम रहा था। साथियों का ख्याल आ रहा था।”
घर पहुंचे तो आंसुओं से हुआ स्वागत
किसी तरह घर पहुंचे। मां भाग देई, पत्नी पुष्पा और 11 व 9 साल की बेटियां सविता और अंजलि दरवाजे पर रोते हुए मिलीं।

“उन्होंने आंसुओं के साथ मेरा स्वागत किया। सच कहूं तो मैं अब भी सामान्य नहीं हूं। मौत को बहुत पास से देखकर आया हूं ना।”
एक सवाल जो पीछा नहीं छोड़ रहा
विकर सिंह अब तक उस एक पल को भूल नहीं पा रहे हैं – जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा था।
पांगी की इस वादी में आज 13 चूल्हे ठंडे हैं। और एक शख्स है जो जिंदा है… लेकिन हर रात उसी मंजर के साथ सोता है।