कुल्लू, करंट न्यूज़:
पार्वती वैली, जीभी और कसोल में “पर्यटन के नाम पर” चल रही रेव पार्टियों और ड्रग नेक्सस का मामला अब कुल्लू के तीन बड़े अफसरों के लिए जी का जंजाल बन गया है। तबादला झेल चुके पूर्व *डीसी अनुराग चंद्र* और पूर्व *एसपी मदन लाल कौशल* को अभी इस झमेले से राहत नहीं मिली है।
मामला अब देश की दो सबसे बड़ी अदालतों में एक साथ पहुंच गया है। *10 अगस्त सोमवार को सुप्रीम कोर्ट* और *20 अगस्त को हिमाचल हाईकोर्ट* में इस पर सुनवाई होनी है।
*हाईकोर्ट ने कसी थी नकेल, सुप्रीम कोर्ट ने दी आंशिक राहत*
हिमाचल हाईकोर्ट ने 24 जून 2026 को दिए आदेश में साफ कहा था कि कसोल और आसपास रेव पार्टियों को अनुमति देने में अधिकारियों की “मूक सहमति या मिलीभगत” की जांच हो। इसके लिए एफआईआर दर्ज कर *एसआईटी* गठित करने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद डीसी, एसपी और एसडीएम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शीर्ष अदालत ने *27 जुलाई और 4 अगस्त* के आदेशों में एफआईआर और एसआईटी पर रोक लगा दी। लेकिन साथ में यह भी साफ कर दिया कि *हाईकोर्ट के तबादला आदेश हर हाल में लागू होंगे*।
नतीजा – 5 अगस्त को डीसी और एसपी कुल्लू का तबादला हो गया। एसडीएम की याचिका 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। उनका तबादला आदेश भी जल्द आने की संभावना है।
*“5000 से 7 लाख तक एंट्री, जंगल में खुलेआम नशा”*
यह पूरा विवाद *हिमालयन एनवायरनमैंट प्रोटैक्शन सोसायटी कुल्लू* की याचिका CWPIL 53/2025 से शुरू हुआ। याचिका में आरोप है कि कसोल, जीभी, मनाली और पार्वती वैली में पर्यटन की आड़ में करोड़ों की रेव पार्टियां हो रही थीं। एंट्री फीस *5 हजार से 7 लाख रुपये* तक थी। आरोप ये भी कि पार्टियों में नशा खुलेआम बिकता था और ये सब “प्रभावशाली लोगों के संरक्षण” के बिना मुमकिन नहीं।
हाईकोर्ट ने सरकार से पिछली सुनवाई में 4 सवाल पूछे थे:
1. कितनी एफआईआर हुईं?
2. गिरफ्तार लोगों की उम्र क्या है?
3. आयोजकों की पहचान और कमाई की जांच हुई?
4. उनकी संपत्ति कुर्क/जब्त क्यों नहीं हुई?
*जन दबाव और कोर्ट की सख्ती से 12 जून के बाद रुकी पार्टियां*
स्थानीय लोगों का गुस्सा और हाईकोर्ट की सख्ती का असर ये हुआ कि *12 जून के बाद घाटी में रेव पार्टियों पर ब्रेक लग गया*। उससे पहले नशा माफिया ने खूब “चांदी कूटी”। हाईकोर्ट की तल्खी के बाद पुलिस-प्रशासन अलर्ट हुआ और अवैध आयोजन बंद हुए।
अब सबकी निगाहें *10 अगस्त सुप्रीम कोर्ट* और *20 अगस्त हाईकोर्ट* की सुनवाई पर हैं। तबादला तो हो गया, लेकिन क्या अधिकारियों पर एफआईआर की तलवार लटकेगी? इसका फैसला आने वाले दिनों में होगा।