धर्मचंद यादव, संपादक करंट न्यूज़।
साढ़े तीन साल… और कुल्लू, मंडी व लाहुल-स्पीति आज भी सत्ता की चौखट पर “लावारिस” बनकर खड़े हैं। वजह साफ है – मंत्रिमंडल में इन जिलों की कोई सुनवाई नहीं।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू कुल्लू के विधायक *सुंदर ठाकुर* को मंत्री बनाने की घोषणा तो बार-बार करते आ रहे हैं, लेकिन फाइल मात्र घोषणाओं से आगे नहीं बढ़ पा रही है। नतीजा? जनता को सिर्फ घोषणा पर घोषणा और विकास सिफर पर अटका हुआ है। वहीं सुक्खू की यह घोषणाएं जनता में अब क्षोभ पैदा करने लगी हैं।
*“महज घोषणाओं से संतुष्ट नहीं होगा कुल्लू”*
स्थानीय लोग अब खुलकर सवाल पूछ रहे हैं। उनका गुस्सा जायज है। कुल्लू की एक महिला का बेहद तीखे शब्दों में कहना है कि “चुनाव से पहले वादे, जीत के बाद घोषणाएं और साढ़े तीन साल बाद भी कुर्सी खाली। ये मजाक नहीं तो और क्या है?”
युवाओं का कहना है कि जब तक कैबिनेट में कुल्लू का अपना नुमाइंदा नहीं होगा, तब तक सड़कें, अस्पताल और पर्यटन के प्रोजेक्ट फाइलों में ही धूल फांकते रहेंगे। बुजुर्गों का दर्द है कि “हमने वोट मंत्री बनाने के लिए दिए थे, उपेक्षा सहने के लिए नहीं।”
*विकास की रफ्तार पर लगा ब्रेक*
मंडी संसदीय क्षेत्र के तीन महत्वपूर्ण जिले कुल्लू, मंडी और जनजातीय जिला लाहुल-स्पीति पिछले साढ़े तीन साल से बिना कैबिनेट प्रतिनिधित्व के चल रहे है। इसका सीधा असर जमीनी विकास पर पड़ रहा है।
बजट घोषणाएं कागजों तक सीमित, केंद्रीय योजनाओं में फॉलोअप नहीं, और जिला की समस्याएं शिमला के गलियारों में धूल फांक रही हैं। पर्यटन, सेब बागवानी, आपदा राहत – हर मोर्चे पर कुल्लू को “पीछे” धकेला जा रहा है।
*घोषणाओं के बावजूद देरी क्यों?*
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सीएम सुक्खू को सुंदर ठाकुर पर भरोसा है और उन्होंने दो-तीन बार सार्वजनिक मंचों से उन्हें मंत्री बनाने की बात कही है, तो फिर अमलीजामा पहनाने में देरी क्यों? यह सवाल अब केवल कुल्लू में ही नहीं बल्कि प्रदेश भर में कुलबुलाहट करने लगा है।
कुल्लू की जनता को अब घोषणाएं नहीं, कुर्सी चाहिए। उन्हें लॉलीपॉप नहीं, अधिकार चाहिए।
लोगों का साफ कहना है कि सीएम साहब, “कुल्लू अब और इंतजार नहीं करेगा। या तो वादे पूरे करो, या फिर मान लो कि ये जिला आपकी प्राथमिकता में ही नहीं है।”
सत्ता की सियासत अपनी जगह, लेकिन साढ़े तीन साल की लावारिसी के बाद कुल्लू, मंडी और लाहुल-स्पीति की जनता अब हिसाब मांग रही है।