मंडी, करंट न्यूज़: मंडी नगर निगम में मेयर-डिप्टी मेयर का चुनाव महज पदों का बंटवारा नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर पनप रहे ‘सत्ता संघर्ष’ और ‘वर्चस्व की लड़ाई’ का प्रत्यक्ष प्रमाण बन गया है। आज 14 पार्षदों के शपथग्रहण के बाद होने वाले चुनाव में प्रचंड बहुमत के बावजूद भाजपा खेमे में *‘घमासान’* मचा है। सवाल सीधा है कि क्या मेयर का ताज राजनीतिक निष्ठा के सिर सजेगा या फिर वरिष्ठता को सम्मान मिलेगा?
*‘सर्किट हाउस में शक्ति प्रदर्शन’: जयराम-अनिल की अलग-अलग लकीर*
शपथ से ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और सदर विधायक अनिल शर्मा ने सर्किट हाउस में पार्टी पार्षदों की बैठक बुलाई है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि *यह बैठक महज औपचारिकता नहीं, बल्कि मेयर-डिप्टी मेयर के नाम पर ‘मुहर’ लगाने का आखिरी दांव* है।
*असली टकराव यहीं है:*
सूत्रों की मानें तो जयराम ठाकुर की ‘पहली पसंद पहली बार निगम पहुंचे गगन शर्मा हैं, भले ही वे नगर परिषद में दो-तीन बार पार्षद रह चुके हों। वहीं विधायक अनिल शर्मा का ‘तुरुप का पत्ता’ भी कोई और नव-निर्वाचित चेहरा है। दोनों ही दिग्गजों की पसंद *नए चेहरे* हैं, जबकि *दूसरी बार लगातार जीतकर आए वरिष्ठ पार्षद हाशिए पर धकेले जा रहे हैं।*
*‘इतिहास खुद को दोहराएगा?’*
यह पूरा घटनाक्रम नगर निगम के पिछले चुनाव की ‘कड़वी याद’ ताजा कर रहा है। तब *वार्ड नंबर 6 से लगातार दूसरी बार जीते वीरेंद्र सिंह आर्य* को मेयर बनाने का *‘झुनझुना’ जयराम ठाकुर और महेंद्र सिंह ठाकुर ने पकड़ाया था*। चुनाव तक आर्य को मेयर बनाने का *‘झांसा’* दिया जाता रहा, लेकिन ऐन मौके पर *राजनीतिक घनिष्ठता और ‘अपनी पसंद’ के पार्षद को ताज पहना दिया गया*। वीरेंद्र आर्य को *‘दरकिनार’* कर दिया गया।
*आज फिर वही पटकथा दोहराई जा रही है।*
इस बार भी *वीरेंद्र सिंह आर्य, सुमन, नेहा और निर्मल* लगातार दूसरी बार जीतकर *‘शहरी सरकार’* बनाने पहुंचे हैं। *नैतिकता और वरिष्ठता का तकाजा है कि ताज इन्हीं में से किसी के सिर सजे।* लेकिन सियासी फिजा बता रही है कि *‘वफादारी का वजन’ वरिष्ठता पर भारी पड़ने वाला है।*
*‘क्लेश की चिंगारी सुलग रही’: वरिष्ठ पार्षदों में अंदरूनी रोष*
भाजपा के भीतर ही दबे स्वर में सवाल उठ रहे हैं: *क्या लगातार दूसरी बार जनता का विश्वास जीतने वाले पार्षदों की ‘तपस्या’ का कोई मोल नहीं? क्या सिर्फ ‘हाईकमान की नजदीकी’ ही एकमात्र योग्यता रह गई है?*
आशंका जताई जा रही है कि अगर जयराम ठाकुर फिर से वरिष्ठता को ‘रौंदकर’ अपनी पसंद थोपते हैं, तो नगर निगम में ‘कलह का बवंडर’ उठना तय है। यह ‘अंदरूनी क्लेश’ आने वाले समय में भाजपा के लिए *‘आत्मघाती’* साबित हो सकता है।
*‘शहर की निगाहें उपायुक्त की बैठक पर’: 2 बजे होगा ‘फैसला’*
फिलहाल सभी की ‘टकटकी’ उपायुक्त द्वारा 2 बजे बुलाई गई बैठक पर लगी है। यहीं से तय होगा कि मंडी *‘शहरी सरकार का सरदार’ कौन होगा*। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह चुनाव *लोकतांत्रिक मूल्यों, वरिष्ठता और कार्यकर्ता के सम्मान* का होगा या फिर *‘व्यक्तिगत पसंद और राजनीतिक घनिष्ठता’* की भेंट चढ़ जाएगा?
वहीं, मंडी की जनता पूछ रही है कि क्या भाजपा में अब ‘जनादेश’ से बड़ा ‘नेतादेश’ हो गया है?