शिमला, करंट न्यूज़ : कुल्लू के कसोल के जंगलों में धड़ल्ले से चल रही रेव पार्टियों पर आखिरकार हिमाचल हाईकोर्ट का हथौड़ा चल ही गया। पार्टियों पर आंख मूंदकर बैठे पुलिस-प्रशासन को कोर्ट ने सीधे निशाने पर लेते हुए *SP कुल्लू और संबंधित SDM का तुरंत तबादला* करने के आदेश जारी कर दिए हैं। कोर्ट ने दो-टूक टिप्पणी करते हुए कहा कि “जंगलों में ऐसी पार्टियां कानून व्यवस्था पर विपरीत असर डालती हैं, और ये बर्दाश्त नहीं।”
*पुलिस की ‘नींद’ पर HC का तमाचा*
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने कसोल में आयोजित हो रही रेव पार्टियों का स्वत: संज्ञान लिया।
कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा कि “स्थानीय पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे जंगल में नशे की महफिलें सज रही थीं, लेकिन कार्रवाई जीरो”। पहले DLSA कुल्लू के सचिव को मौके का निरीक्षण कर 10 दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया था। अब सीधे SP और SDM को हटाने का आदेश देकर कोर्ट ने साफ कर दिया कि *लापरवाही की कीमत अफसरों को चुकानी पड़ेगी*।
*संयोजकों पर ‘कड़ी कार्रवाई’ के आदेश, DC-SP से मांगा हलफनामा*
खंडपीठ ने रेव पार्टियों के आयोजकों पर ‘कड़ी से कड़ी कार्रवाई’ करने को कहा है। साथ ही कुल्लू के डिप्टी कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक को निजी हलफनामा दाखिल कर मीडिया में छपी खबरों पर स्पष्टीकरण देने को कहा है। कोर्ट ने दोहराया कि “जंगलों में कोई भी गैरकानूनी पार्टी नहीं होनी चाहिए”। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।
*HC का पुराना रुख: नशे पर ‘जीरो टॉलरेंस’*
ये पहली बार नहीं है जब हाईकोर्ट ने नशे और रेव पार्टियों पर सख्ती दिखाई हो।
*2023:* मनाली-मलाणा क्षेत्र में विदेशियों की रेव पार्टियों पर कोर्ट ने DGP से जवाब तलब किया था और कहा था कि *“हिमाचल को उड़ता पंजाब नहीं बनने देंगे”*।
*2024:* कसोल-तोश में चल रहे अवैध कैफे और नशे के अड्डों पर कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए *‘रूटीन गश्त और औचक छापे’* के आदेश दिए थे।
*2025:* सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद HC ने प्रदेशभर में ड्रग माफिया पर नकेल कसने के लिए *हर जिले में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स* बनाने को कहा था।
*पुलिस की ‘ठुकाई’ तय थी: सवाल जो उठते हैं*
*खुफिया तंत्र फेल या मिलीभगत?* कसोल जैसे संवेदनशील इलाके में जंगल में टेंट लगते रहे, DJ बजते रहे, नशा परोसा जाता रहा और लोकल पुलिस को भनक तक नहीं? या जानबूझकर अनदेखी की गई?
*SDM-SP जिम्मेदार क्यों?* कानून व्यवस्था बनाए रखना सीधे SP और SDM की जिम्मेदारी है। जब DLSA सचिव को 10 दिन में रिपोर्ट देने भेजा गया, तो क्या स्थानीय अफसर पहले सो रहे थे?
*‘संरक्षण’ का आरोप:* स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना राजनीतिक-प्रशासनिक शह के जंगल में रेव पार्टियां मुमकिन नहीं। HC के तबादला आदेश ने इस आशंका पर मुहर लगा दी है।
*अब आगे क्या:* 6 अगस्त को DC और SP को बताना होगा कि पार्टियां कैसे चल रही थीं और अब तक क्या कार्रवाई हुई। HC के तेवर देखकर लगता है कि “सिर्फ तबादले से बात नहीं बनेगी, कुछ अफसरों पर गाज गिरना तय है”।