कुल्लू, करंट न्यूज : हिमाचल प्रदेश के कुल्लू के सैंज में एशिया की महत्वकांक्षी एनएचपीसी की पार्वती जल विद्युत परियोजना के चरण-दो में मंगलवार से विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है। प्रारंभिक चरण में परियोजना की चार में से तीन यूनिट में विद्युत उत्पादन शुरू हो गया है।
मंगलवार को मीडिया कर्मियों से पहली बार रूबरू होते हुए एनएचपीसी के कार्यपालक निदेशक निर्मल सिंह ने बताया कि पार्वती चरण-दो में चार टरबाइन लगी हुई हैं, जिनसे 800 मेगावाट विद्युत उत्पादन होगा। बताया कि फिलहाल चार में से तीन टरबाइनों का ट्रायल सफल रहा। जिन्होंने विद्युत उत्पादन शुरू कर दिया है।

जबकि, चौथी टरबाइन का ट्रायल चल रहा है, जल्द ही उसमें भी विद्युत उत्पादन शुरू हो जाएगा। इस तरह से चारों टरबाइन से क्रमशः 200-200 मेगावाट विद्युत उत्पादन करेंगी। बताया कि पार्वती परियोजना में उत्पादित बिजली से देश के नौ राज्य रोशन होंगे।
निर्मल सिंह ने बताया कि भारत सरकार का नवरत्न उपक्रम एनएचपीसी केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के तहत भारत का सबसे बड़ा जलविद्युत विकास संगठन है। जिसके पास जलविद्युत परियोजनाओं की अवधारणा से लेकर कमीशनिंग तक सभी गतिविधियों को संचालित करने की क्षमता है। वहीं, एनएचपीसी ने सौर एवं पवन ऊर्जा विकास क्षेत्र में भी विविध प्रसार किया है।

बताया कि कंपनी की कुल संस्थापित क्षमता 7883 मेगावाट (संयुक्त उद्यम में 1682 मेगावाट सहित) है। जिसमें 23 जलविद्युत पावर स्टेशनों से 7571.20 मेगावाट, छह सौर ऊर्जा परियोजनाओं से 261.70 मेगावाट और एक पवन ऊर्जा परियोजना से 50 मेगावाट शामिल है। इसके अतिरिक्त, एनएचपीसी के पास 10154 मेगावाट निर्माणाधीन परियोजनाओं का पोर्टफोलियो है। जिसमें 8714 मेगावाट की नौ जलविद्युत परियोजनाएं (संयुक्त उद्यम में पांच 3134 मेगावाट सहित) और 1440 मेगावाट की छह सौर परियोजनाएं शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि पार्वती चरण-दो जलविद्युत परियोजना, जिसकी कुल संस्थापित क्षमता 800 मेगावाट मेगावाट है, यह एक ’रन ऑफ द रिवर’ परियोजना है। जिसमें कुल्लू जिले में पार्वती नदी पर छोटे पॉण्डेज का निर्माण किया गया है। मणिकरण घाटी में पुलगा गांव के निकट 83.7 मीटर ऊंचा कंक्रीट बाँध बनाकर पार्वती नदी की जल धारा को मोड़कर पानी को 31.56 किलोमीटर लंबी हेड रेस सुरंग के माध्यम से सैंज घाटी के सिउंड तक ले जाया जा रहा है।
जहां सिउंड गांव में पावर हाउस का निर्माण किया गया है। पुलगा और सिउंड के बीच 862.50 मीटर की कुल ऊंचाई का उपयोग 800 मेगावाट विद्युत उत्पादन के लिए किया जा रहा है। हेड रेस सुरंग के साथ आने वाले, पांच नालों के पानी के मिलने से पार्वती के जल प्रवाह में और अधिक वृद्धि हुई है।
उन्होंने बताया कि परियोजना की 31.56 किलोमीटर लंबी एचआरटी भारत की सबसे लंबी जलविद्युत सुरंग है। दो इन्कलाइन्ड प्रेशर शाफ्ट, जो प्रत्येक 1545.5 मीटर लंबा है, टीबीएम से खोदी गई दुनिया की सबसे लंबी इन्कलाइन्ड प्रेशर शाफ्ट सुरंगें हैं।
बताया कि हिमाचल प्रदेश को इस परियोजना से 12 फीसदी निःशुल्क ऊर्जा मिलेगी और 1 फीसदी अतिरिक्त निःशुल्क ऊर्जा का उपयोग स्थानीय क्षेत्र विकास निधि के लिए किया जाएगा।

निर्मल सिंह के मुताबिक परियोजना की अनुमानित पूर्णतः लागत 13,045 करोड़ रुपए है। परियोजना की डिज़ाइन ऊर्जा 3074 मिलियन यूनिट (एमयू) है। इस परियोजना के चालू होने से 520 मेगावाट क्षमता के पार्वती चरण-तीन पावर स्टेशन की उत्पादन क्षमता भी 1262 मिलियन यूनिट प्रति वर्ष बढ़ जाएगी।
बताया कि एनएचपीसी एक हरित ऊर्जा कंपनी है, जो केवल नवीकरणीय संसाधनों से विद्युत उत्पादन करती है। जबकि प्रतिष्ठित पार्वती चरण-दो परियोजना का कमीशन होना एनएचपीसी के लिए स्वर्ण जयंती वर्ष में एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है।