मंडी, 5 सितंबर: सरकार द्वारा बिजली बोर्ड में स्मार्ट मीटर खरीदने की योजना को एक बार फिर अमलीजामा पहनाने की कवायद चल पड़ी है। जिस पर बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन पूरी तरह से उखड़ गई है और इसका विरोध करना शुरू कर दिया है।
मंडी में आयोजित प्रदेश बिजली बोर्ड कर्मचारी यूनियन के सम्मेलन में कर्मचारी यूनियन ने प्रदेश सरकार को चेताया है कि अगर सरकार ने स्मार्ट मीटर खरीदने की योजना को बंद नहीं किया तो कर्मचारी सड़कों पर उतरकर इसका विरोध करेंगे।

हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत परिषद कर्मचारी यूनियन के महासचिव हीरा लाल वर्मा ने मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए खुलासा करते हुए बताया कि घाटे में चल रहे बिजली बोर्ड के सिर पर 3100 करोड़ खर्च करके स्मार्ट मीटर खरीदने की योजना बनाई जा रही है।
कहा कि यह योजना सरकार, बिजली बोर्ड, कर्मचारियों और आम जनता के हित में नहीं है। बल्कि इससे विद्युत दरों में बढ़ोतरी होगा और बिल देने वाले कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हिमाचल में किसी भी तरह से स्मार्ट मीटर की खरीद नहीं होनी चाहिए। अगर फिर भी सरकार ने स्मार्ट मीटर खरीदे तो फिर विद्युत परिषद कर्मचारी यूनियन द्वारा इसका डटकर विरोध किया जाएगा।
हीरा लाल वर्मा ने कहा कि बदहाली के दौर से गुजर रहे बिजली बोर्ड पर 2980 करोड़ के उस ऋण की अदायगी का भार डालने का प्रयास किया जा रहा है, जिसकी देनदारी प्रदेश सरकार की बनती है। प्रदेश सरकार को चाहिए कि इस ऋण की अदायगी खुद करे। यदि बोर्ड इसकी अदायगी करता है तो फिर बोर्ड पर और ज्यादा वित्तीय भार पड़ेगा इसका खामियाजा कर्मचारियों को ही भुगतना पड़ता है।

उन्होंने प्रदेश सरकार से अन्य विभागों की तर्ज पर पुरानी पेंशन को बहाल करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही कर्मचारियों ने प्रदेश के आर्थिक तौर पर संपन्न लोगों से स्वेच्छा से 125 यूनिट बिजली को त्यागने का आग्रह भी किया है।
वर्मा ने कहा कि पहले ही बिजली बोर्ड की तरफ से प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को 2300 करोड़ की सब्सिडी दी जा रही है। ऐसे में अगर फ्री बिजली देने का क्रम जारी रहा तो फिर बोर्ड का दिवालिया हो जाएगा। जिसका खामियाजा भी कर्मचारियों को ही भुगतना पड़ेगा।