करंट न्यूज ब्यूरो
रामपुर बुशहर
कोरोना संक्रमण काल में एक तरफ सरकार कहती हैं कि अन्यावशक रूप से घरों से बाहर नहीं निकलें। लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकार ऐसे लोगांे को राहत दे रही है। जो दिन को को कमा कर रात को अपने परिवारों को रोटी का प्रबंध करने हैं?
कुमारसेन क्षेत्र के कांगल की समाज सेविका रीना ठाकुर का कहना है कि चूंकि छोटे-छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-फहड़ी वालों, बारबर और कपड़े सिलने वाले दर्जियों आदि को अपनी रोजी-रोटी की चिंता सताने लगी है। जो दिन में कमा कर शाम को अपने परिवार कि रोटी का प्रबंध करते हैं। धीरे-धीरे इन लोगों का कारोबार खत्म हो रहा है।
रीना ठाकुर ने कहा कि इस समय ऐसे लोगो का कारोबार पूरी तरह से ठप पड़ गया है। उन्हें अब अपने परिवार का पालन पोषण करना और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना भी मुश्किल हो गया है। इसके साथ ही उनको बैंकों के ऋण कि किश्तें देना भी मुश्किल हो गया है।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि छोटे दुकानदारों व वाले मध्यम और गरीब परिवारों को कोविड-19 के चलते हर महीने 7500 रुपए और 35 किलो राशन फ्री दिया जाए। जिससे वह अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें।
रीना ठाकुर ने मांग की है कि छोटे और मध्यम वर्ग के दुकानदारों की 3 लाख तक कि बैंक लिमिट माफ की जाए। इस के अतिरिक्त लोगों के बिजली और पानी के बिल 6 महीने तक माफ किये जाएं।
इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष हरीश गुप्ता ने कहा है कि कोरोना की दूसरी लहर के चलते लोगों का जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। लोगों के साथ साथ व्यापारियों का काम धंधा भी चैपट हो गया है।
उन्होंने कहा है कि प्रदेश के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि, बागवानी, पर्यटन और व्यापार से जुड़ी गतिविधियां है। इस से जुड़े सभी व्यवसायियों ने किसी न किसी रूप से बैंकों से लोन ले रखा हैं।
उन्होंने कहा कि आज लोगों को अपने परिवार की रोजी-रोटी की चिंता सता रही है। इस विपदा के समय सरकार को सभी तरह के बैंकों के ऋण की वसूली स्थगित कर देनी चाहिए। जब तक करोना कम नहीं हो जाता तब तक है ऋणों पर ब्याज माफ कर देना चाहिए।