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चैलचौक (मंडी), करंट न्यूज़ : मंडी जिले का सबसे चर्चित और विवादित ‘जिला स्तरीय नलवाड़ मेला ख्योड़-2026’ इस बार न केवल प्रशासनिक और कानूनी पचड़ों में फंसा हुआ है, बल्कि नाचन विधानसभा क्षेत्र की सियासत का सबसे बड़ा अखाड़ा बन चुका है।

एक तरफ जहां हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों को दरकिनार कर कॉलेज और प्राइमरी स्कूल के प्रांगण में मेला सजाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी और भाजपा के राजनीतिक दांवपेच ने इस मेले के रंग में ‘सियासी तड़का’ लगा दिया है।

हाईकोर्ट के आदेशों की उड़ रही धज्जियां

मामला बेहद गंभीर और कानूनी रूप से पेचीदा है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने CWPIL No. 146/2017 (आदेश 22.09.2017) के तहत साफ हिदायत दी है कि किसी भी शिक्षण संस्थान के परिसर का उपयोग व्यावसायिक, सांस्कृतिक या गैर-शैक्षणिक गतिविधियों के लिए नहीं किया जा सकता।

हाल ही में 01.09.2026 को लंबाथाच कॉलेज परिसर में मेला आयोजित करने की ऐसी ही याचिका (CMP No. 21841/2026) को माननीय हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बावजूद, बासा पंचायत में 17 से 24 सितंबर 2026 तक चलने वाले ‘नलवाड़ मेला ख्योड़’ के लिए बासा महाविद्यालय (जहां 1,000 से अधिक छात्र पढ़ते हैं) और साथ लगते प्राथमिक विद्यालय डुगराईं के मैदान पर बिना न्यायालय की अनुमति के दुकानें और स्टॉल सजा दिए गए हैं। इसे लेकर हाईकोर्ट में जनहित शिकायत याचिका भी दाखिल कर दी गई है।

कांग्रेस सरकार में भाजपा विधायक ने गाड़ा ‘खूंटा’, कांग्रेसी गुटों में मची रार

प्रदेश में भले ही कांग्रेस सत्ता में हो, लेकिन मेले के उद्घाटन पर कब्जा भाजपा का ही रहा। 17 सितंबर को भव्य जलेब में भाजपा विधायक विनोद कुमार ने आन-बान-शान से पगड़ी पहनकर मेले का शुभारंभ कर दिया।

वहीं, भाजपा प्रभाव वाली स्थानीय पंचायत प्रधान—जो कभी कांग्रेसी घराने से थीं लेकिन अब भाजपा के पाले में हैं—ने चतुराई भरा दांव खेलते हुए 19 सितंबर को कांग्रेस एससी विभाग के प्रदेशाध्यक्ष नरेश चौहान से प्रदर्शनी का उद्घाटन करवा दिया।

इस पूरे घटनाक्रम से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नजदीकी और एससीएसटी विकास निगम के अध्यक्ष लाल सिंह कौशल को किनारे कर दिया गया, जिससे नाचन कांग्रेस की अंदरूनी सिर-फुटौव्वल चौराहे पर आ गई है। लगातार चार चुनाव हार चुकी नाचन कांग्रेस की इस आपसी ‘नूराकुश्ती’ का मजा भाजपा विधायक बखूबी ले रहे हैं।

बड़ा सवाल: क्या आएंगे उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री?

मेले में पहुंचे नरेश चौहान ने दावा किया है कि मेले के समापन समारोह (क्लोजिंग) में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। हालांकि, मेला समिति ने अभी तक उनके नाम का निमंत्रण पत्र भी नहीं छापा है।

कानूनी और प्रशासनिक जानकारों की मानें तो उपमुख्यमंत्री का इस मेले में आना लगभग नामुमकिन है। बिना हाईकोर्ट की अनुमति के गैर-कानूनी तरीके से शिक्षण संस्थान के प्रांगण में चल रहे मेले में शामिल होना सीधे तौर पर अदालत के आदेशों की अवहेलना के दायरे में आता है।

सुरक्षा और कानूनी पेचीदगियों के चलते सीआईडी और जिला प्रशासन (DC/SDM) उपमुख्यमंत्री कार्यालय को ऐसी जगह जाने से बचने की सलाह देगा, जहां अवमानना का केस पहले से विचाराधीन हो। विपक्षी दल भाजपा और शिकायतकर्ता इस मौके की ताक में हैं। कोई भी संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसी स्थिति में जाकर सरकार और अपनी किरकिरी नहीं कराना चाहेगा।

क्या होगा आगे?
जमीन पर प्लॉट कट चुके हैं, व्यापारी दुकानें लगा चुके हैं और नेता मंच से बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर हाईकोर्ट की सख्ती, प्रशासनिक जांच की लटकती तलवार और 1,000 से अधिक विद्यार्थियों की बाधित होती पढ़ाई ने ख्योड़ मेले को एक कानूनी विस्फोट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।

अब देखना यह होगा कि 24 सितंबर तक चलने वाले इस मेले में कानून का चाबुक चलता है या सियासत बाजी मारती है!

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