गोहर (मंडी), करंट न्यूज़ : हिमाचल में अफसरशाही पर सरकार का चाबुक चला है। ग्रामीण विकास विभाग ने विकास खंड गोहर के खंड विकास अधिकारी (BDO) पवन कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
*निलंबन की असली वजह क्या?*
सूत्रों के अनुसार मामला पंचायत सचिवों के तबादला आदेशों को महीनों तक लटकाने का है। सरकार ने गोहर ब्लॉक में कई पंचायत सचिवों के ट्रांसफर ऑर्डर जारी किए थे, लेकिन BDO पवन कुमार ने उन्हें जानबूझकर रिलीव नहीं किया। उच्च अधिकारियों ने कई बार वैध निर्देश जारी किए, मगर BDO टस से मस नहीं हुए।
आखिर मामला शिमला दरबार तक पहुंचा और सरकार ने इसे सीधे-सीधे *आदेशों की अवमानना और प्रशासनिक अनुशासन का गंभीर उल्लंघन* मानते हुए कड़ी कार्रवाई कर दी।
*शिमला अटैच, बिना इजाजत नहीं छोड़ सकेंगे हेडक्वार्टर*
ग्रामीण विकास विभाग ने CCS (CCA) नियम, 1965 के नियम 10(1) के तहत निलंबन आदेश जारी किया है। आदेश में साफ लिखा है – पवन कुमार सक्षम उच्च प्राधिकारी के वैध निर्देशों का पालन करने में विफल रहे। निलंबन काल में उनका मुख्यालय निदेशालय ग्रामीण विकास, शिमला रहेगा और बिना पूर्व अनुमति के वे मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।
आदेश पर अवर सचिव (ग्रामीण विकास) के हस्ताक्षर हैं और कॉपी निदेशक ग्रामीण विकास, मंडलायुक्त मंडी, DDO मंडी को भेजी गई है।

*अफसरों में हड़कंप, सरकार का सख्त संदेश*
गोहर में इस कार्रवाई के बाद विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मचा है। प्रशासनिक हलकों में इसे सिर्फ सस्पेंशन नहीं, बल्कि सरकार की *जीरो टॉलरेंस नीति* के तौर पर देखा जा रहा है।
संदेश साफ है – जनहित और शासन व्यवस्था से जुड़े आदेशों को टालना, दबाना या मनमर्जी चलाना अब बर्दाश्त नहीं होगा। जांच पूरी होने तक BDO सस्पेंड रहेंगे और अब जांच में खुलेगा कि आखिर किन सचिवों के तबादले रोके गए, क्यों रोके गए और इसके पीछे क्या खेल था।