वन्य प्राणी संरक्षण में मील का पत्थर – 1.67 करोड़ की लागत से बना टाइगर एंक्लोजर
रेणुका जी (सिरमौर), करंट न्यूज़ : हिमाचल प्रदेश में वन्य प्राणी संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक दिन। 11 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार रेणुका जी चिड़ियाघर को रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा मिल गया है।
*महाराष्ट्र से 1900 किमी का सफर तय कर पहुंचे टाइगर*
आज रविवार दोपहर करीब 1 बजे महाराष्ट्र के गोरेवाड़ा से लाया गया टाइगर का जोड़ा रेणुका जी चिड़ियाघर पहुंचा। नर टाइगर की उम्र करीब 5 साल और मादा की उम्र 3 साल है। डॉ. शहनवाज IFS, DCF शिमला वाइल्डलाइफ के नेतृत्व में 7 सदस्यीय टीम ने 1900 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर इस जोड़े को सुरक्षित हिमाचल पहुंचाया।
*1.67 करोड़ से तैयार हुआ वर्ल्ड क्लास एंक्लोजर*
अरण्यपाल वन्यप्राणी वृत शिमला दक्षिण, प्रीति भंडारी IFS ने बताया कि रॉयल बंगाल टाइगर की आवासीय व्यवस्था के अनुरूप लगभग 1 करोड़ 67 लाख की लागत से एंक्लोजर एवं अन्य व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं।

उन्होंने कहा कि टाइगर जोड़े का हिमाचल आना वन्य प्राणी संरक्षण के लिए मील का पत्थर साबित होगा और भविष्य में रेणुका जी जू पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगा।
*एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत हुआ आदान-प्रदान*
उप अरण्यपाल शिमला, डॉ. शहनवाज IFS ने बताया कि इस एक्सचेंज की अप्रूवल अगस्त 2026 में प्राप्त हुई थी। वन्यजीव आदान-प्रदान के तहत हिमाचल के रेणुका जी चिड़ियाघर से रेड जंगल फॉल (जंगली मुर्गे) का जोड़ा महाराष्ट्र के नागपुर स्थित Tiger Rescue Centre को दिया गया और उसके बदले में हिमाचल को टाइगर का जोड़ा मिला है।
उन्होंने इस सफल आदान-प्रदान के लिए सभी अधिकारियों का आभार व्यक्त किया जिनके संयुक्त प्रयासों से यह संभव हो पाया।