शिमला/कुल्लू | करंट न्यूज़: कुल्लू में “रेव पार्टी” को लेकर छिड़े विवाद ने अब कार्यकारी बनाम न्यायपालिका का रूप ले लिया है। आरोप है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद सुक्खू सरकार कुल्लू के 3 अधिकारियों का तबादला करने से बच रही है। विपक्ष ने इसे सीधे तौर पर “न्यायपालिका की अवहेलना” करार दिया है।
क्या था हाईकोर्ट का आदेश?
कुल्लू में रेव पार्टी मामले की जांच को निष्पक्ष बनाने के लिए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पहले ही 3 अधिकारियों के तत्काल तबादले के आदेश दे रखे हैं। कोर्ट का मानना था कि जब तक ये अधिकारी पद पर रहेंगे, निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।
लेकिन सूत्रों के अनुसार आदेश के कई दिन बीत जाने के बाद भी इन अधिकारियों को उनके पदों से नहीं हटाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी नहीं दी राहत
मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो वहां से भी सरकार को झटका लगा। सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट के तबादला आदेश पर रोक लगाने से साफ इंकार कर दिया। इसके बावजूद राज्य सरकार ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
CM से मुलाकात के बाद और बढ़ा सियासी बवाल
सूत्रों के हवाले से खबर है कि बीते दिन तीन में से दो अधिकारियों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात भी की। इसके बाद से अटकलें और तेज हो गई हैं कि “सरकार क्या खिचड़ी पका रही है?”
विपक्ष का आरोप है कि सरकार अपने “करीबी” अधिकारियों को बचाने के लिए जानबूझकर आदेशों की अनदेखी कर रही है। भाजपा नेता इसे “सत्ता का दुरुपयोग और संविधान पर हमला” बता रहे हैं।
6 अगस्त को होगी अगली सुनवाई, कोर्ट के कड़े रुख की संभावना
इस पूरे मामले में हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 6 अगस्त को तय है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार ने तब तक तबादला आदेश जारी नहीं किए तो हाईकोर्ट बेहद कड़ा रुख अपना सकती है। अवमानना की कार्रवाई तक की नौबत आ सकती है।
सरकार की चुप्पी, प्रशासन में हड़कंप
फिलहाल सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वहीं कुल्लू प्रशासन में भी खासी बेचैनी है। अधिकारियों के तबादले को लेकर फाइलें कहां अटकी हैं, इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
सवाल: जांच प्रभावित होगी या कानून का राज?
रेव पार्टी मामला पहले ही प्रदेश की राजनीति में तूल पकड़ चुका है। अब तबादलों को लेकर जारी गतिरोध से सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार निष्पक्ष जांच चाहती है या मामले को दबाना चाहती है?
6 अगस्त की सुनवाई में हाईकोर्ट क्या रुख अपनाता है, इस पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हैं।
नोट: अंतिम स्थिति हाईकोर्ट के आदेश और सरकार की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।