शिमला | करंट न्यूज़; हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के तबादलों के लिए लागू ‘स्टे क्लबिंग’ नियम को सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि यह नियम प्रशासनिक सुधार और दुर्गम क्षेत्रों में खाली पदों को भरने के लिए बेहद जरूरी है।
*यह है पूरा मामला?*
मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने रविंदर सिंह की अपील को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।
याचिकाकर्ता का तबादला राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शिवपुर (सिरमौर) से कोफोटा (सिरमौर) किया गया था। कर्मचारी ने इसे चुनौती देते हुए कहा कि शिवपुर में उनका कार्यकाल सिर्फ 11 महीने का था।
लेकिन विभाग ने आदेश में साफ लिखा था कि 10 किलोमीटर के दायरे में पिछली सेवा अवधि को जोड़कर यह तबादला किया गया है। सिंगल जज बेंच से याचिका खारिज होने के बाद कर्मचारी ने खंडपीठ में अपील की थी।
*कोर्ट ने क्या कहा ?*
खंडपीठ ने 27 अक्टूबर 2023 को शिक्षा सचिव द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन को सही माना। इसके तहत 30 किलोमीटर के दायरे में दी गई सेवाओं को एक ही स्टेशन का स्टे मानकर जोड़ा जाता है।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि शिक्षा विभाग में यह बड़ी समस्या बन गई है कि कर्मचारी नीति का फायदा उठाकर 8-10 किलोमीटर के दायरे में एक स्कूल से दूसरे स्कूल तबादला करवा लेते हैं और सालों तक एक ही क्षेत्र में बने रहते हैं।
इस कारण दूरदराज और ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली रह जाते हैं।
*याचिकाकर्ता का रिकॉर्ड देखा गया*
अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता पिछले 10 वर्षों से सिर्फ सिरमौर जिले के भीतर ही पांवटा साहिब, जौली और शिवपुर जैसे नजदीकी स्टेशनों पर कार्यरत रहा है। यह उनका तय सामान्य कार्यकाल से बहुत अधिक था।
खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के आदेश को तर्कसंगत मानते हुए कर्मचारी की अपील खारिज कर दी।
*‘स्टे क्लबिंग’ नियम से क्या होगा?*
अब 30 किमी के दायरे में की गई कुल सेवा को एक ही जगह का कार्यकाल माना जाएगा। इससे कर्मचारियों का एक ही क्षेत्र में लंबे समय तक जमे रहना रुकेगा। दुर्गम और ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती आसान होगी। तबादला नीति का दुरुपयोग कम होगा।