शिमला | करंट न्यूज़ : सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में सरकारी भूमि पर करीब 1.67 लाख अवैध कब्जों को हटाने के मामले में बड़ा अंतरिम आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए विवादित संपत्तियों पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
इससे प्रदेश में फिलहाल सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई पर रोक लग गई है।
*सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?*
न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायाधीश संदीप मेहता की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका – SLP पर सुनवाई की।
कोर्ट ने *यथास्थिति के आदेश* दिए। अगले आदेश तक विवादित संपत्ति की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा।
दूसरे पक्ष *पूनम गुप्ता व अन्य* को नोटिस जारी किया।
राज्य सरकार की याचिका दायर करने में हुई देरी को माफ कर दिया।
इस मामले को पहले से लंबित SLP (Civil) No. 30494/2025 के साथ संलग्न कर दिया ताकि दोनों की सुनवाई एक साथ हो सके।
*यह है पूरा मामला*
यह मामला *हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट* के *5 अगस्त 2025* को *CWP 1028/2002 – पूनम गुप्ता* मामले में दिए गए अंतिम फैसले से जुड़ा है।
*हाईकोर्ट ने क्या कहा था:*
हिमाचल प्रदेश भू-राजस्व अधिनियम की *धारा 163-A को असंवैधानिक* करार दिया। सरकार को तय समय सीमा में *सरकारी भूमि से सभी अवैध कब्जे हटाने* के आदेश दिए। कोर्ट की राय थी कि अवैध कब्जों को नियमित करने का प्रावधान कानून के अनुरूप नहीं है और इससे अतिक्रमण को बढ़ावा मिलता है।
हाईकोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार और अन्य विभागों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
*अब आगे क्या?*
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल विवादित जमीन या संपत्ति पर किसी भी तरह का निर्माण, बदलाव या कब्जा हटाने की कार्रवाई नहीं हो सकेगी।
अब दोनों संबंधित SLP की सुनवाई एक साथ होगी और उसी में अंतिम फैसला आएगा।
*हिमाचल में सरकारी जमीन नियमितीकरण का पूरा इतिहास: 2002 से 2025 तक*
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध कब्जे हटाने पर अंतरिम रोक के बीच, हिमाचल में सरकारी भूमि नियमितीकरण का मामला 23 साल पुराना है।
*वर्ष 2002:* नियमितीकरण नीति और आवेदन
पूर्व सरकार ने 2002 में नियमितीकरण नीति के तहत सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों से आवेदन मांगे थे।
*आंकड़े:*
*आखिरी तारीख*: 15 अगस्त 2002
*कुल आवेदन मिले* :*1,67,339*
*कुल जमीन*: *24,198 एकड़* सरकारी भूमि के नियमितीकरण की मांग
*वर्ष 2017: ड्राफ्ट नियम जारी*
इसके बाद 2017 में सरकार ने 5 बीघा तक सरकारी भूमि पर अतिक्रमण को नियमित करने के लिए ड्राफ्ट नियम भी जारी किए थे।
लेकिन इन नियमों को अदालत में चुनौती मिल गई। बाद में सरकार ने स्पष्ट किया था कि उसके पास अवैध कब्जों को नियमित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
*2025: हाईकोर्ट का सख्त फैसला*
*5 अगस्त 2025* को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने CWP 1028/2002 में
भू-राजस्व अधिनियम की धारा 163-A को असंवैधानिक घोषित किया। सरकार को समय सीमा में सभी 1.67 लाख कब्जे हटाने के आदेश दिए
3. कहा – नियमितीकरण से अतिक्रमण को बढ़ावा मिलता है
*अब सुप्रीम कोर्ट में क्या?*
सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं और मामले को SLP 30494/2025 के साथ जोड़ दिया है।
मतलब अब अगले आदेश तक 2002 में मांगे गए 1.67 लाख आवेदनों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी और न ही जमीन से कब्जा हटेगा।
अब सुप्रीम कोर्ट ही तय करेगा कि 24 हजार एकड़ सरकारी जमीन का क्या होगा।