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धर्मचंद यादव, संपादक करंट न्यूज़।

हिमाचल भाजपा में लंबे समय से संगठनात्मक उठा पटक चली हुई है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को मद्देनजर रखते हुए प्रदेश भाजपा के कुछ नेताओं के साथ-साथ राष्ट्रीय भाजपा कार्यकारिणी भी इस मसले पर पूरी तरह से संजीदा है और प्रदेश के संगठन में आमूल चूल फेर बदल का खाका बना जाने लगा है।

क्योंकि केंद्रीय नेतृत्व का भी मानना है कि पिछले विधानसभा चुनाव में जिस तरह से प्रदेश भाजपा के कुछ नेताओं के अड़ियल रवैये के कारण पार्टी में विद्रोह हुआ और कई जीताऊ नेताओं के टिकट काट दिए गए, कइयों के विधानसभा क्षेत्र बदल दिए गए।

जिसकी वजह से विधानसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर भीतर घात हुआ और पार्टी हिमाचल प्रदेश में सत्ता में आने से वंचित हो गई। कई बड़े नेताओं को अनुशासन हीनता के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। जिसका नुकसान भाजपा आज भी झेलती आ रही है।

लेकिन हैरत तो इस बात की भी है कि उसके बाद भी लगातार अभी तक प्रदेश भाजपा में नेताओं की आपसी उठा पटक जारी है। एक दूसरे को नीचा दिखाने की लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जिसकी वजह से अक्सर प्रदेश में भाजपा की स्थिति बेहद हास्यस्पद हो रही है।

माना जा रहा है कि भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा इन स्थितियों को मद्देनजर रखते हुए प्रदेश भाजपा में बड़े स्तर पर सियासी बदलाव लाने की तैयारी की जा रही है।

जानकार सूत्रों की माने तो प्रदेश में भाजपा संगठन को और ज्यादा मजबूत करने के लिए दिल्ली में लगातार बैठकें हो रही है। प्रदेश के कई नेताओं के साथ गोपनीय चर्चाएं भी हो रही है। इसके साथ ही प्रदेश में भाजपा से निष्कासित व पार्टी के भीतर बने नेताओं के रिपोर्ट कार्ड भी लगभग तैयार कर लिए गए हैं।

भाजपा के ही अंदरूनी सूत्रों की माने तो बहुत जल्द हिमाचल भाजपा में बड़ा फेरबदल होने वाला है। इतना ही नहीं बल्कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी से निष्कासित किए गए दो दर्जन से ज्यादा नेताओं की घर वापसी का ताना-बाना भी बुन लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान जिन नेताओं ने बागी होकर चुनाव लड़ा था, उनकी भी वापसी तय है।

यह भी जानकारी मिली है कि कुल्लू से प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता राम सिंह की भी बड़ी जिम्मेदारी के साथ पार्टी में वापसी हो रही है।

भाजपा के सूत्रों की माने तो केंद्रीय नेतृत्व ने राम सिंह को लेकर अपने स्तर पर उनके निजी सियासी जनाधार का आकलन करवाया, तो उनका रिपोर्ट कार्ड काफी बेहतर पाया गया है। यह भी माना जा रहा है कि राम सिंह ने दो विधानसभा चुनाव लड़े भले ही वह जीत नहीं पाए हैं, लेकिन उन्होंने हर चुनाव में लगभग 12 से 13 हजार वोट हासिल किए हैं।

ऐसे में पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अगर राम सिंह की पार्टी में वापसी होती है और उन्हें विधानसभा चुनाव में उतारा जाता है तो निश्चित तौर पर वह बड़े अंतर से विधानसभा चुनाव जीत सकते हैं। क्योंकि कुल्लू सदर विधानसभा क्षेत्र से अगले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के पास फिलहाल कोई भी सशक्त जिताऊ प्रत्याशी नजर नहीं आ रहा है, जो कांग्रेस विधायक सुंदर ठाकुर को टक्कर दे सके।

ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि अगले विधानसभा चुनाव में राम सिंह को सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। हालांकि अभी इस संदर्भ में सिर्फ सियासी चर्चा ही चली है। इन के अलावा लाहुल स्पीति से रामलाल मारकंडे की भी घर वापसी होने की चर्चा है।

क्योंकि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व का भी मानना है कि लाहुल स्पीति में रामलाल मारकंडे ही वह नेता है जिन्होंने पहली बार लाहुल स्पीति में कमल खिलाया था। भविष्य में भी वही भाजपा को लाहुल स्पीति में संजीवनी देने में सक्षम साबित हो सकते हैं।

इसके साथ ही द्रंग से जवाहर ठाकुर की भी घर वापसी की चर्चा है। इनके साथ ही प्रदेश भर से लगभग दो दर्जन से ज्यादा भाजपा नेताओं की वापसी की कवायद चली हुई है। जिन्हें पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किया गया था।

फिलहाल देखना यह है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व इस संबंध में कितनी जल्दी फैसला लेता है और किन किन नेताओं की घर वापसी हो पाती है। सियासी सूत्रों की माने तो इस संबंध में लगभग पूरी तैयारी हो गई है, संभवत जल्द ही इसकी आधिकारिक तौर पर घोषणा हो सकती है।

उधर राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अगर निष्कासित नेताओं की घर वापसी होती है तो निश्चित तौर पर प्रदेश भाजपा संगठन में बड़े स्तर पर सियासी उलटफेर हो सकता है।

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