शिमला | करंट न्यूज़ :
कसोल में धड़ल्ले से चल रही रेव पार्टियों पर हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रशासन की गर्दन कस दी है। कोर्ट ने एक बार फिर साफ कर दिया कि “प्रशासन की मौन सहमति या साठगांठ” के बिना इतने बड़े आयोजन संभव नहीं हैं। इसी कड़ी में कोर्ट ने डीसी, एसपी और एसडीएम के तबादले के आदेश में संशोधन की मांग खारिज कर दी।
*“पहले ट्रांसफर, फिर सुनवाई” – हाईकोर्ट का दो टूक फैसला*
कुल्लू के डीसी, एसपी और संबंधित एसडीएम ने 24 जून को जारी ट्रांसफर आदेश में बदलाव की मांग करते हुए अदालत में अर्जी लगाई थी। अधिकारियों का आग्रह था कि मामले की सुनवाई तय तारीख 6 अगस्त से पहले की जाए।
लेकिन *मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी* की खंडपीठ ने यह आवेदन सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा – पहले आदेश का पालन हो, तभी बात होगी।
हाईकोर्ट पहले ही राज्य सरकार को निर्देश दे चुका है कि एक्शन न लेने वाले इन तीनों अफसरों का एक हफ्ते के भीतर तबादला किया जाए।
*डीएसपी की रिपोर्ट के अगले दिन ही लाउड म्यूजिक की इजाजत!*
कोर्ट ने फाइलों का रिकार्ड खंगालते हुए प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।
हाईकोर्ट ने पाया कि *5 जून 2026* को डीएसपी और स्थानीय थाना प्रभारी ने लिखित रिपोर्ट दी थी कि रेव पार्टी का स्थल “बेहद सुनसान जंगल” में है और वहां नशीले पदार्थों की खपत-तस्करी की पूरी आशंका है।
लेकिन रिपोर्ट आने के अगले ही दिन *6 जून को संबंधित एसडीएम ने आयोजकों को लाउड म्यूजिक चलाने की अनुमति दे दी*। कोर्ट ने इसे सीधे-सीधे मिलीभगत माना।
*“10 हजार से 5 लाख तक टिकट, ये कोई सामान्य आयोजन नहीं”*
बेंच ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जहां 4 से 5 हजार लोगों की क्षमता वाले आयोजनों में *10 हजार से 16 हजार रुपये प्रति व्यक्ति* और कई मामलों में *5 लाख से 7 लाख रुपये एंट्री फीस* वसूली जा रही हो, वहां यह “बड़ा कमर्शियल धंधा” है।
कोर्ट ने कहा, “हमारे लिए मानना नामुमकिन है कि स्थानीय प्रशासन की मौन सहमति के बिना इतना बड़ा आयोजन चल रहा था।”
हाईकोर्ट ने पूरे मामले की *एसआईटी जांच* के आदेश भी दिए हैं। अब 6 अगस्त को अगली सुनवाई में देखना होगा कि सरकार ने डीसी, एसपी और एसडीएम का तबादला किया या नहीं।
फिलहाल अदालती सख्ती के चलते तीनों अफसरों को कोई राहत नहीं मिली है।