धर्मचंद यादव, संपादक करंट न्यूज़।
हिमाचल प्रदेश में नगर निकाय के बाद पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव भी संपन्न हो गए। हालांकि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में बहुत सारे स्थान पर भारी विवाद की स्थिति भी पैदा हुई है। जिससे निपटने के लिए वहां के स्थानीय प्रशासन द्वारा कतई गंभीर प्रयास नहीं किए गए।
लेकिन सत्ता का सेमीफाइनल कहे जाने वाले इन चुनावों ने खासतौर पर कांग्रेस को आइना दिखा दिया कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव परिणाम उसके लिए किसी भी तरह से संतोषजनक नहीं रहेंगे।
प्रदेश के अधिकतर कांग्रेस विधायकों व मंत्रियों को इन चुनावों ने उनकी भविष्य की राजनीतिक दशा व दिशा साफ कर दी है कि उनके लिए 2022 का विधानसभा चुनाव जीतना पत्थर से पानी निकालने के बराबर होगा।

इसी तरह कुल्लू में भी सदर से कांग्रेस विधायक सुंदर ठाकुर के लिए भी नगर निकाय व पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव में संभवत हार की पटकथा लिखे ही गए हैं।
क्योंकि नगर निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में जिस तरह से विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को निशाने पर रखा, उसे एक बात तो साफ हो गई लगती है कि वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव जीतने के लिए उन्हें नाकों चने चबाने पड़ेंगे।
क्योंकि नगर निकाय के चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गोपाल कृष्ण महंत को ठिकाने लगाने के लिए नगर परिषद के 11 वार्डों में से आठ वार्डो पर कांग्रेस को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा। मनमाने निर्णय लेते हुए ऐसे प्रत्याशी खड़े किए, जो अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए।
एक तरह से उनके आंगन में कांग्रेस की ऐसी धज्जियां उड़ी कि वर्षों से नगर परिषद पर कब्जा जमाने वाली कांग्रेस को आज बहुमत हासिल करने के लिए भी चार हाथ का सहारा नहीं मिल पा रहै है।
जिस तरह से सुंदर ठाकुर ने गोपाल कृष्ण महंत की नगर परिषद के चुनाव के दौरान घेराबंदी की, निश्चित तौर पर उसके परिणाम विधानसभा चुनाव के दौरान उनके लिए काफी पीड़ादायक रहेंगे। वहीं, शहरी कांग्रेस संगठन भी इस चुनाव में पूरी तरह से छिन्न-भिन्न हो गया है।
हालांकि जिला में संगठन के नाम पर कांग्रेस के पास कुछ भी नहीं है। यही वजह है कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में भी कांग्रेस की खूब छीछालेदर हुई। खास तौर पर जिला परिषद के चुनाव में प्रत्याशियों का चयन करने में भी सुंदर ठाकुर ने मनमाना रवैया अख्तियार करते हुए अधिकतर स्थानों पर अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करने या उन्हें हराने के लिए कार्य किया।
साफ तौर पर कहें तो जिला परिषद चुनाव में मौहल वार्ड से चुनाव लड़ रही पूर्व मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ठाकुर सत्य प्रकाश की धर्मपत्नी प्रेमलता के खिलाफ प्रत्याशी देने के साथ-साथ ही उन्हें हराने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाया। उनके लिए खुद चुनाव प्रचार भी किया।

लेकिन वहां पर भी सुंदर ठाकुर को मुंह की खानी पड़ी। उनके द्वारा खड़ी की गई कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी चुनाव परिणाम में तीसरे स्थान पर रही। जबकि प्रेमलता ठाकुर दूसरे स्थान पर रही।
जिस तरह से सुंदर ठाकुर ने जिला परिषद के मौहल वार्ड में खुलेआम वरिष्ठ कांग्रेस नेता सत्य प्रकाश ठाकुर के खिलाफ मोर्चा खोला, निश्चित तौर पर उसके परिणाम भी 2027 के चुनाव में उनके लिए सुखद नहीं रहने वाले हैं। क्योंकि सत्यप्रकाश ठाकुर व उनकी धर्मपत्नी का आज भी अच्छा जनाधार है।
इसके साथ ही उन्होंने जरड़ भुट्टी कॉलोनी में भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की राय न मानकर अपनी मर्जी से प्रत्याशी दिया, जो चुनाव मैदान में तीसरे स्थान पर रहा। जबकि इस वार्ड में भाजपा के ही तीन प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। लेकिन इसके बावजूद भी जरड़ भुट्टी कॉलोनी वार्ड से कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी बुरी तरह से चुनाव हार गए।

अगर साफतौर पर कहा जाए तो जिस तरह से नगर निकाय व पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में सुंदर ठाकुर ने मनमानी करते हुए कांग्रेस संगठन का बेड़ा गर्क किया और अपनों को ठिकाने लगाने के लिए प्रयासरत रहे। निश्चित तौर पर उन्होंने इन चुनावों के बहाने 2017 के चुनाव में अपने लिए अभी से हार की पटकथा लिख ली है। अगर यह सारे कांग्रेसी नेता उनके खिलाफ एकजुट हो गए तो निश्चित तौर पर सुंदर ठाकुर को चुनाव जीतने में भारी संकट खड़ा हो जाएगा।
देखना यह है कि गोपाल महंत, सत्य प्रकाश ठाकुर और खिमीराम शर्मा अपनी जुगलबंदी सुंदर ठाकुर के खिलाफ बना पाते हैं या नहीं?