कुल्लू, करंट न्यूज़ : धार्मिक आस्था और परंपराओं का सम्मान एक सराहनीय मिसाल पेश की है। जो देवसमाज में भी सार्थक चर्चा का विषय बना हुआ है।
उल्लेखनीय है कि संत निरंकारी मिशन द्वारा आयोजित सन्त समागम के मद्देनजर “ठारा करड़ू री सौह” से विख्यात ढालपुर मैदान में देवी-देवताओं की थडियों को भी पूरी तरह गरिमामय सम्मान दिया है।

मिशन के स्वयंसेवकों द्वारा देवी देवताओं की थड़ी (देवी देवताओं के बैठने का साथ) के चारों ओर रस्सी बांधकर उसे संरक्षित किया गया, ताकि किसी भी प्रकार से स्थानीय लोगों की देवताओं से जुड़ी धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
गौरतलब है कि ढालपुर मैदान कुल्लू की सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है, जहां समय-समय पर विभिन्न धार्मिक आयोजन और मेले आयोजित होते हैं। ऐसे में यहां स्थित देवी-देवताओं की थड़ी स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है।
संत निरंकारी मिशन ने इस धार्मिक महत्व को समझते हुए आयोजन के दौरान विशेष सतर्कता बरती और थड़ी के आसपास सुरक्षा घेरा बनाकर इसे सम्मानपूर्वक संरक्षित किया।
मिशन के इस कदम की स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं द्वारा खूब सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि इस प्रकार के कार्य समाज में आपसी सद्भाव और धार्मिक सहिष्णुता को मजबूत करते हैं। यह पहल न केवल मिशन की संवेदनशीलता को दर्शाती है, बल्कि अन्य आयोजकों के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।

इसके साथ ही, निरंकारी मिशन द्वारा आयोजन स्थल पर स्वच्छता, अनुशासन और व्यवस्था का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। स्वयंसेवकों की टीम लगातार मैदान में व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में जुटी हुई है, जिससे आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

समग्र रूप से देखा जाए, तो संत निरंकारी मिशन का यह प्रयास धार्मिक आस्था के प्रति सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है, जो समाज में सकारात्मक संदेश दे रहा है। वहीं, देवसमाज द्वारा भी इसकी सराहना की जा रही है।