कुल्लू, धर्मचंद यादव : हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला के प्रवेश द्वार भुंतर में बहने वाले खोखन नाले के आसपास बड़े पैमाने पर हुए अवैध कब्जों का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। जबकि पूर्व में भी कई बार नाले में आसपास हुए अवैध कब्जों को हटाने की कवायद हालांकि कुछ समय पहले भी चलती रही है।

लेकिन राजनीतिक दखल व प्रशासनिक उदासीनता के चलते वह कवायद हर बार ठंडे बस्ते में ही कैद हो कर रह गई। जिला प्रशासन ने भी इस तरफ से आंखें मूंदे रखी।
हालांकि कुछ समय पहले उपायुक्त कुल्लू तोरुल एस रवीश ने एसडीएम कुल्लू को अवैध कब्जों के मामलों को देखने के निर्देश जरूर दिए थे। लेकिन उसके भी परिणाम धरातल पर नहीं दिख रहे हैं। जबकि नाले के आसपास हुए अवैध कब्जे अभी बदस्तूर बने हुए हैं। इसी तरह से नाले के ऊपर बनाए गए पक्के पार्किंग स्थलों को भी नहीं हटाया गया है।

ऐसे में मानसून के प्रकोप को मद्देनजर रखते हुए खोखन नाला कभी भी भुंतर बाजार में तांडव कर सकता है। भले ही नाले के तल को कुछ गहरा जरूर कर दिया गया है। लेकिन उसकी चौड़ाई अभी भी कोई स्थान पर 2 से 4 फीट की बनी हुई है।

ऐसे में अगर पूर्व की तरह नाले में बाढ़ आई तो निश्चित तौर पर भुंतर बाजार में काफी नुकसान हो सकता है। जबकि पूर्व में भी यह नाला बरसात के मौसम में खूब तबाही करता आया है। जिसका खामियाजा स्थानीय दुकानदार व लोगों को भुगतना पड़ता है।
हालांकि हालांकि अवैध कब्जे न हटाए जाने के मसले पर भुंतर बाजार के दुकानदारों में भी काफी रोष है। लेकिन राजनीतिक कारणों से वह भी खुलकर इसके विरोध में आगे नहीं आ रहे हैं।
फिलहाल कुछ लोग इस मामले को प्रदेश हाई कोर्ट में ले जाने की कवायद में लगे हुए हैं ताकि भुंतर बाजार व खोखन नाले के आसपास हुए अवैध कब्जों को हटाकर नाले को चौड़ा करवाया जा सके।

क्योंकि हर साल खोखन नाले में आने वाली बाढ़ के कारण भुंतर बाजार मलबे से भर जाता है। जिसके कारण खास तौर पर दुकानदारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और मलबा हटाने के लिए भी प्रशासन को भारी खर्च करना पड़ता है।
लेकिन अवैध कब्जों को हटाने के लिए किसी भी तरह से ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही है। जिसकी वजह से अवैध कब्जाधारियों के हौंसले पूरी तरह से बुलंद है।

हालांकि उपायुक्त कुल्लू तोरुल एस रवीश के ध्यान में पूरा मामला है, लेकिन अभी तक उन्होंने भी इस पर कड़ा रुख नहीं दिखाया है।
ऐसे में अब लोग सवाल पूछने लगे हैं कि हाई कोर्ट के निर्देशों के बावजूद भी अवैध कब्जों को हटाने के लिए कौन कार्रवाई करेगा?