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करंट न्यूज ब्यूरो
शिमला

निदेशक भाषा एवं संस्कृति विभाग सुनील शर्मा ने बताया कि भाषा एवं संस्कृति विभाग द्वारा इस वर्ष पं० चन्द्रधर शर्मा गुलेरी जयन्ती के उपलक्ष्य में राज्य स्तरीय साहित्यिक समारोह का शुभारम्भ ऑनलाईन माध्यम से किया गया। इस समारोह के प्रथम दिन 6 जुलाई को लेखक गोष्ठी व दूसरे दिन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के प्रथम दिन लेखक गोष्ठी में डॉ० प्रत्यूष गुलेरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ० राजेन्द्र राजन ने की।

राज्य स्तरीय समारोह में डॉ० प्रत्युष गुलेरी द्वारा ’’चंद्रधर शर्मा गुलेरी के साहित्य के विविध आयाम‘‘ विषय पर शोध पत्र पढ़ा गया। इस शोध पत्र पर सोलन से वरिष्ठ साहित्यकार डॉ० शंकर वासिष्ठ, मंडी से डॉ० विजय विशाल, शिमला से आत्मा रंजन, सिरमौर से भुवन जोशी, बिलासपुर से अरूण डोगरा, हमीरपुर से डॉ० शंकुतला राणा, चंबा से केवल भारती, कांगड़ा से कल्याण जग्गी व कुल्लू से तोबदन ने परिचर्चा में भाग लिया।

डॉ० विजय विशाल ने गुलेरी के निबंधों में भाषा के प्रतिष्ठित दृष्टिकोण की बात कही। डॉ० शंकर वासिष्ठ ने गुलेरी जी के साहित्य रचना तथा साहित्य में मूल्यों के स्वरूप का वर्णन किया।

उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दूसरे दिन कवि सम्मेलन की अध्यक्षता पूर्व प्रशासनिक अधिकारी व वरिष्ठ साहित्यकार के. आर. भारती ने की। समारोह में आमंत्रित कवियों में किन्नौर से राम भगत ने ‘संबंध बड़े नहीं होते, उसे संभालने वाल बड़े होते है’, बिलासपुर से संदेश शर्मा‘ ये मिट्टी से पुते घर, घरौंदे ये पुराने’ ऊना से अशोक कालिया ने ‘न मैं उसकी लकीरों में, न वो मेरी परेशानी में, खत्म किरदार अब मेरा हुआ उसकी कहानी में’ कविता का पाठ किया।

जबकि मंडी से रूपेश्वरी शर्मा ने ‘तुमने कहा था’, कांगड़ा से रेखा डढवाल ने ‘ना गिला कोई ना मलाल है’ शिमला से दिनेश शर्मा ने ‘हाय डिजिटल यह समय ई-वमन से भर रहा खोखलापन अपना’ हमीरपुर से देश राज कमल ने ‘ढूंढता हूं इस भूलोक के गांवों शहरों गलियारों में’, मंडी से पवन चौहान ने ‘गांव के चूल्हे पर’ कविता का पाठ किया।

हमीरपुर से देशराज कमल ने ‘भयभीत मन देश राज कमल’, सोलन से सविता ठाकुर ने ‘सुन ली थी तेरे पांव की आहट’ शिमला से ओम भारद्वाज ने शिमला के बंदर पर, कांगड़ा से अदिति गुलेरी ने ‘सोचें तो तुम्हारी यादों का बसंत भी यहीं है’ व चंबा से तपेश ने गुलेरी जी पर अपनी कविता पढ़ीे। के.आर. भारती ने अध्यक्षीय भाषण से पूर्व कोरोना पर कविता पाठ किया।

उन्होंने बताया कि पं० चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने साहित्य की कोई भी विधा ऐसी नहीं छोडी, जिस पर उनकी पकड़ न रही हो। इसी कारण उनके निबन्ध तथा आधुनिक कहानियां हिंदी साहित्य में अपनी छाप छोड़ गए हैं।

इस दो दिवसीय आयोजन में हिमाचल प्रदेश के लगभग 30 कवि-विद्वान लेखकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में विभाग के उप-निदेशक प्रेम प्रसाद पंडित व राजकुमार सकलानी, सहायक निदेशक कुसुम संघाईक, सहायक निदेशक अल्का कैंथल, अतिरिक्त निदेशक डॉ. सुरेश जस्वाल तथा भाषा अधिकारी सरोजना नरवाल व अमित गुलेरी भी जुड़े रहे।

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