चंडीगढ़, करंट न्यूज़ : CBI के 5 लाख रिश्वत मामले में फंसे रोपड़ रेंज के निलंबित DIG हरचरण सिंह भुल्लर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से एक बार फिर झटका लगा है। *जस्टिस मनीषा बत्रा* ने भुल्लर की *दूसरी नियमित जमानत याचिका खारिज* करते हुए उन्हें जेल में ही रहने का आदेश दिया।
*“रकम बरामद न होना बरी करने का आधार नहीं”*
कोर्ट ने साफ कहा कि आरोपी से *सीधे रकम बरामद न होना* महत्वपूर्ण नहीं है जब *सह-आरोपी ने उसकी ओर से रिश्वत स्वीकार की हो*।
जस्टिस बत्रा ने कहा कि *वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के पद* और मामले में *कई पुलिसकर्मियों के गवाह* होने के कारण गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
*क्या है पूरा मामला*
*CBI के अनुसार* भुल्लर ने एक कारोबारी के खिलाफ दर्ज *FIR में कार्रवाई से राहत और अनुकूल व्यवहार* के बदले *कृष्णानु के जरिए रिश्वत* मांगी थी।
जांच के दौरान दोनों के बीच हुई *बातचीत रिकॉर्ड* की गई, जिसमें *₹8 लाख* लेने की बात सामने आई।
*16 अक्टूबर 2025* को चंडीगढ़ में CBI के ट्रैप के दौरान *कृष्णानु को शिकायतकर्ता से ₹5 लाख लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार* किया गया। उसी दिन *DIG भुल्लर को भी गिरफ्तार* कर लिया गया।
*हाईकोर्ट ने क्या कहा*
*प्रथम दृष्टया मामला बनता है*: FIR, रिकॉर्डेड बातचीत, verification report और trap proceedings से रिश्वत मांगने का ठोस आधार मिलता है।
*गवाह प्रभावित हो सकते हैं*: भुल्लर का वरिष्ठ पुलिस पद होने के कारण गवाहों पर दबाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। भले ही वह निलंबित हैं।
*परिस्थितियों में बदलाव नहीं*: पिछली जमानत याचिका खारिज होने के बाद कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले में *चार्ज फ्रेम हो चुके हैं और ट्रायल शुरू* हो चुका है, लेकिन अभी तक *गवाहों के बयान दर्ज नहीं हुए हैं*। ऐसे में जमानत देना उचित नहीं।
*भुल्लर की दलील खारिज*
भुल्लर के वकील ने दलील दी थी कि उनसे *कोई रकम बरामद नहीं हुई* और निलंबित होने के कारण वह *गवाहों को प्रभावित नहीं कर सकते*। कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया।
अब भुल्लर को ट्रायल की कार्यवाही पूरी होने तक जेल में ही रहना पड़ेगा।