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मंडी | करंट न्यूज़:
कीरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना से जुड़े भूमि अधिग्रहण मामले में *भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई)* को *जिला अदालत मंडी* से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने प्रभावित परिवार के पक्ष में *आर्बिट्रेटर द्वारा बढ़ाए गए मुआवजे* को बरकरार रखते हुए एनएचएआई की याचिका खारिज कर दी है।

*शुरुआत में मिला था 38.81 लाख का मुआवजा*

मामला *मंडी जिले की औट तहसील के टकोली* निवासी *बंसी लाल* से जुड़ा है। फोरलेन निर्माण के लिए उनकी भूमि और मकान *संरचना संख्या 102* का अधिग्रहण किया गया था।

शुरुआत में *सक्षम प्राधिकारी* ने *4 दिसंबर 2019* को मकान का मुआवजा *38,81,000 रुपये* तय किया था। बंसी लाल ने इस राशि को अपर्याप्त मानते हुए *आर्बिट्रेटर-कम-मंडलायुक्त मंडी* के समक्ष अपील दायर की।

*आर्बिट्रेटर ने बढ़ाकर किया 40.04 लाख

7 अगस्त 2023 को आर्बिट्रेटर ने फैसला सुनाते हुए मकान का मुआवजा बढ़ाकर *40,04,312 रुपये* कर दिया। साथ ही *9 से 15 प्रतिशत की दर से ब्याज* देने का भी आदेश दिया गया।

*एनएचएआई ने दी थी कोर्ट में चुनौती*

आर्बिट्रेटर के इस फैसले से असंतुष्ट होकर एनएचएआई ने *मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 34* के तहत जिला अदालत में याचिका दायर की।

एनएचएआई का तर्क था कि आर्बिट्रेटर ने *बिना पर्याप्त साक्ष्यों के मनमाने ढंग से प्लिंथ एरिया रेट* की गणना की है और *नए भूमि अधिग्रहण कानून 2013* के तहत *गलत तरीके से ब्याज* तय किया है।

*अदालत ने एनएचएआई की दलील खारिज की*

वहीं भू-मालिक की ओर से कहा गया कि *सुप्रीम कोर्ट के फैसलों* के अनुसार भवन के मूल्य में कोई कटौती नहीं होनी चाहिए और उन्हें इससे भी अधिक मुआवजा मिलना चाहिए।

दोनों पक्षों की दलीलें और रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद *जिला न्यायाधीश मंडी* ने स्पष्ट किया कि धारा 34 के तहत अदालत के पास आर्बिट्रेटर के अवार्ड की समीक्षा के अधिकार बेहद सीमित हैं। अदालत तभी हस्तक्षेप कर सकती है जब फैसले में कोई स्पष्ट खामी या गैर-कानूनी बात हो।

अदालत ने कहा कि मुआवजा *सार्वजनिक हित* में तय किया गया है और यह *लोक नीति के खिलाफ नहीं* है। इसलिए एनएचएआई की अपील को *आधारहीन मानते हुए खारिज* कर दिया गया।

*भू-मालिक को मिली राहत

अदालत के इस फैसले से बंसी लाल परिवार को राहत मिली है और अब उन्हें *40.04 लाख रुपये का बढ़ा हुआ मुआवजा और ब्याज* मिलेगा।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला फोरलेन से प्रभावित अन्य परिवारों के लिए भी नजीर बनेगा।

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