कृष्ण भानु।
कर्नाटक के सियासी घटनाक्रम के बाद प्रदेश में ये अटकलें शुरू हो गई हैं। अटकलों का क्या है, लगाते रहिये!
सिद्धारमैया राजनीति में गऊ परम्परा के वाहक हैं। जैसे कि सुना-पढ़ा जा रहा है, राहुल गांधी ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए कहा, जिसे उन्होंने चुपचाप स्वीकार कर लिया। देश का राजनीतिक इतिहास उन्हें “गऊ” कहेगा।
सत्ता के शिखर से यूं चुपचाप उतर जाना अब कहाँ दिखता है। 77 वर्षीय सिद्धारमैया के यूँ “उठ जाने” के बाद 64 वर्ष के डीके शिवकुमार का कर्नाटक का नया सीएम बनना तय हुआ समझिए।
लेकिन हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में राजनीतिक और “नेतागत” परिस्थितियां भिन्न हैं। कर्नाटक में 2023 के चुनावों में संकल्प लिया गया था कि अढाई वर्ष सिद्धारमैया और बाकी के अढाई वर्ष डीके शिवकुमार सत्ता संभालेंगे। हालांकि सिद्धारमैया तीन वर्ष कुर्सी पर बैठे रहे। दूसरा कारण ‘लक्ष्मी माँ’ भी अवश्य रही होगी।

इधर हिमाचल प्रदेश में ऐसा-वैसा कोई राजनीतिक संकल्प चुनावों के समय नहीं लिया गया था। वैसे भी अब मात्र डेढ़ वर्ष शेष बचे हैं। प्रियंका और राहुल की सुक्खू के प्रति पूरी कृपा है। फिर क्यों कहेंगे कि अब “उठ” जा और मुकेश अग्निहोत्री को आने दे। वैसे, कांग्रेस हाईकमान की मुकेश के प्रति भी कृपा कम नहीं है। लेकिन दोनों की अपनी-अपनी- अलग-अलग “कृपाएं” हैं।
कर्नाटक-हिमाचल में एक अंतर और भी है। बड़ा भी और अहम भी। कर्नाटक के सिद्धारमैया के पास कुल 52 करोड़ की चल-अचल संपति है। करीब 24 करोड़ रुपए का कर्ज भी है। हमारे सुक्खू के पास करीब 8 करोड़ की कुल चल अचल संपत्ति है। इसमें 5.72 लाख रुपये की चल है। 2022 के हलफनामा के अनुसार इसमें दो वाहनों की कीमत शामिल थीं। तो फिर नकदी एक-डेढ़ लाख रुपए से ऊपर क्या रही होगी।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के पास करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपए की कुल संपति है। कर्ज केवल अढ़ाई सौ करोड़ है। कर्नाटक के बड़े पूंजीपतियों में से एक हैं। अतीतकाल में मुसीबत के समय आर्थिक रूप में भी पार्टी आलाकमान के साथ खड़े रहे हैं। भविष्य में खड़े होने का सामर्थ्य भी है।
इधर हमारे उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के पास 2022 में कुल संपति साढ़े पांच करोड़ की थी। इसमें चल संपति करीब चार करोड़ रुपए है। 2022 के हलफनामा के अनुसार करीब 50 लाख रुपए की देनदारियां थीं।
कहने का तात्पर्य यह है कि डीके शिवकुमार आलाकमान और पार्टी के लिए जो कुछ कर सकते हैं अथवा अतीत में करते रहे हैं, वह इधर कौन करेगा? सामर्थ्य नहीं है। सिद्धारमैया को पदच्युत करने का दूसरा कारण यह भी हो सकता है।
तो यकीन मानिए कि सुक्खू 2027 अंत तक दनदनाते रहेंगे। उसके बाद जनता हटाये तो हटा दे लेकिन राहुल गांधी 1बिल्कुल नहीं हटाएंगे।
:- कृष्ण भानु उत्तर भारत के वरिष्ठ पत्रकार हैं। उनकी फेसबुक वॉल से साभार।