शिमला, करंट न्यूज़ : जिन पर सरकार व समाज ने नशे के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी सौंपी थी वही नशे के अवैध कारोबार के सौदागर बन बैठे। खाकी का लिबास पहनकर उसे भी दागदर करने के साथ-साथ इसकी आड़ में नशे के अवैध कारोबार में खुद ही संलिप्त हो गए।
हालांकि सरकार द्वारा नशे की रोकथाम के लिए गठित किए गए एसटीएफ विंग से कतई उम्मीद नहीं थी कि उसमें तैनात कर्मचारी इस हद तक गिर जाएंगे कि खाकी का सम्मान करना भी भूल जाएंगे और समाज में अपनी मान मर्यादा को भी ताक पर रखने देंगे। लेकिन ऐसा हुआ और बेहद ही शर्मनाक हुआ।
एसटीएफ कुल्लू के अधीन तैनात चार पुलिस कर्मचारियों ने खाकी को तार-तार करते हुए नशा तस्करों के साथ हाथ मिला लिए। नशे की सप्लाई अपने ही शहर कुल्लू व आसपास के क्षेत्र में होने दी।
हैरत तो इस बात की भी है कि यह चारों पुलिस कर्मचारी कुल्लू जिला से ही संबंध रखते हैं। जिन पर लोगों को बड़ी आस थी कि यह हमारे नौजवान बच्चों को नशे के दलदल से बचाने के लिए अपने कर्तव्य का ईमानदारी के साथ निर्वहन करेंगे। लेकिन दुख इस बात का है कि इन्हीं चार कर्मचारियों ने अपने ही आसपास के युवाओं को नशे की सप्लाई जारी रखने में मदद की है।
उल्लेखनीय है कि बीते दिनों शिमला में बरामद एक करोड़ रुपये के एलएसडी नशे के मामले में एसटीएफ के कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आने से स्टेट टास्क फोर्स की छवि भी दागदार हुई है।
आरोपों के मुताबिक पुलिस ने जब मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों, उनकी कॉल डिटेल और आईपीडीआर रिपोर्ट खंगाली तो आठ मार्च को इनकी लोकेशन एक ही जगह पर कुल्लू में पाई गई।
पुलिस को संदीप और नविएल हैरिसन से पूछताछ में भी कई अहम सबूत मिले। इससे एसटीएफ के चारों पुलिस कर्मियों की संलिप्तता को लेकर पुलिस के हाथ कई अहम सबूत लगे। मामला उस समय सामने आया जब न्यू शिमला में 10 मार्च को पुलिस ने एलएसडी नशे के साथ संदीप और प्रिया को पकड़ा था।
पुलिस की जांच आगे बढ़ने पर एलएसडी के सप्लायर केरल के रहने वाले नविएल हैरिसन को हरियाणा से पकड़ा गया और अब इस मामले में एसटीएफ के चार कर्मचारी गिरफ्तार किए गए हैं। हालांकि पुलिस विभाग ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पहले चारों कर्मचारियों को पहले निलंबित किया और अब जांच के बाद बर्खास्त करने की बात कही जा रही है।
हैरत इस बात की है कि सरकार ने जिस एसटीएफ का गठन प्रदेश में बढ़ रहे नशा तस्करी के अवैध कारोबार से निपटने के लिए किया था, आज उसी को लेकर ही कई सवाल खड़े हो गए हैं। इसको देखते हुए सीआईडी ने अब एसटीएफ में तैनाती को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने का फैसला लिया है।
इसके साथ ही विभागीय स्तर पर सभी कर्मचारियों के प्रोफाइल को जांचा जा रहा है। वहीं, विभाग का कहना है कि अगर इस मामले में अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यही नहीं, पुलिस विभाग ने सभी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी खोल दी है। अगर जांच में सभी आरोप सही पाए जाते हैं, तो चारों को नौकरी से बर्खास्त किया जाएगा।
सीआईडी के एडीजी ज्ञानेश्वर सिंह का कहना है कि नशा तस्करी के मामलों को लेकर विभाग का कड़ा रुख है। इसमें विभाग के संलिप्त कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में भी विभाग ने जांच के बाद त्वरित कार्रवाई की है।
उन्होंने कहा कि अब विभागीय स्तर पर एसटीएफ में कार्यरत कर्मचारियों के प्रोफाइल को भी जांचा जा रहा है। ताकि भविष्य में इस तरह के मामले सामने न आएं और पुलिस महकमे की छीछालेदर न हो।