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फरीदाबाद (हरियाणा),करंट न्यूज़ : फरीदाबाद के सेक्टर-15 स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक सीए का बैंक लॉकर, जिसमें करीब 2 करोड़ रुपये के जेवरात और कीमती सामान था, कथित तौर पर गायब हो गया है। बैंक का दावा है कि वह लॉकर अब किसी और के नाम पर है।

फ़ीस कटती रही, पर लॉकर ‘गायब’ हो गया

पीड़ित चार्टर्ड अकाउंटेंट डी.सी. गर्ग के अनुसार वह पिछले 12 वर्षों से इस लॉकर का उपयोग कर रहे थे। दो दिन पहले जब उनकी पत्नी लॉकर ऑपरेट करने बैंक पहुंचीं, तो अधिकारियों ने यह कहकर उन्हें चौंका दिया कि उनके नाम पर शाखा में कोई लॉकर ही नहीं है।

पीड़ित के पास लॉकर की असली चाबी

गर्ग के खाते से एक साल पहले तक सालाना लॉकर फीस (2,360) नियमित रूप से कटती रही है। उनके पास आज भी लॉकर की ओरिजिनल चाबी मौजूद है। बैंक अधिकारियों का दावा है कि वह लॉकर नंबर अब विकास चौहान नामक किसी अन्य व्यक्ति को आवंटित किया जा चुका है

करोड़ों का सोना-चांदी गायब होने का आरोप

पीड़ित चार्टर्ड अकाउंटेंट डी.सी. गर्ग ने आरोप लगाया है कि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से उनके लॉकर को तोड़कर दूसरे व्यक्ति को सौंप दिया गया।

उन्होंने बताया कि लॉकर में लगभग 1.25 किलोग्राम सोने की ईंटें, करीब 3 किलोग्राम चांदी और अन्य बहुमूल्य जेवरात और दस्तावेज शामिल हैं।

बैंक की दलील व पीड़ित का पक्ष

बैंक अधिकारियों ने सुझाव दिया कि शायद गर्ग ने पहले ही लॉकर सरेंडर कर दिया होगा। हालांकि, गर्ग ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि लॉकर सरेंडर करने की एक कानूनी कागजी प्रक्रिया होती है और बैंक को ओरिजिनल चाबी वापस करनी पड़ती है, जो कि अभी भी उन्हीं के पास है।

मिलीभगत और कानूनी कार्रवाई

जिला उपभोक्ता फोरम के पूर्व सदस्य और गर्ग के सहयोगी सतीश मित्तल ने इस मामले में बैंक कर्मचारियों की सीधी मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अगर कर्मचारी निर्दोष थे, तो मामले की पारदर्शी जांच करने के बजाय उसे दबाने की कोशिश क्यों की जा रही है?

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