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मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा।

शिमला: हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार अपने तीन साल के कार्यकाल की जन-जवाबदेही मंडी की धरती से पेश करने जा रही है। 11 दिसंबर को आयोजित होने वाले इस राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री सुक्खू न केवल अपनी सरकार की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखेंगे, बल्कि भाजपा के गढ़ माने जाने वाले मंडी से विपक्ष के राजनीतिक दोहरेपन पर तीखा प्रहार भी करेंगे।

मुख्यमंत्री ने समारोह की तैयारियों की समीक्षा बैठक में स्पष्ट कहा कि यह आयोजन केवल जश्न नहीं, बल्कि *जनता के प्रति जिम्मेदारी और पारदर्शिता का संवाद* है।

उन्होंने संकेत दिए कि भाजपा नेताओं को इस मंच से कड़े सवालों का सामना करना पड़ेगा—
“क्यों केंद्र सरकार द्वारा घोषित आपदा राहत राशि अब तक प्रदेश को नहीं मिली? क्यों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश के भाजपा सांसद अपने ही आपदा प्रभावित समर्थकों के हक की राहत लाने में नाकाम रहे?”

सुक्खू ने कहा कि जब राज्य की सड़कों, खेतों और गांवों को आपदा ने निगल लिया था, तब भाजपा नेताओं ने दिल्ली की गलियों में चुप्पी साध ली थी। उन्होंने सवाल किया, “क्या हिमाचल के लोगों की पीड़ा उनके लिए केवल चुनावी मुद्दा रह गई है?”

भाजपा की मौन राजनीति पर चोट

मुख्यमंत्री का यह प्रहार भाजपा की उस चुप्पी पर है जो पिछले कुछ महीनों से केंद्र द्वारा मनरेगा के कार्य दिवसों को आधा किए जाने के बाद भी कायम है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालने वाले इस फैसले पर भाजपा के किसी भी सांसद या नेता ने विरोध नहीं जताया।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, मंडी में समारोह का आयोजन भाजपा के प्रभावक्षेत्र में कांग्रेस का आत्मविश्वास दर्शाता है और सुक्खू सरकार के लिए यह अवसर होगा कि वह अपने “व्यवस्था परिवर्तन” अभियान की उपलब्धियों को जनता के समक्ष रखे।

‘व्यवस्था परिवर्तन’ से लेकर आपदा पुनर्निर्माण तक

तीन साल के कार्यकाल में सुक्खू सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण पुनर्निर्माण और डिजिटलीकरण जैसे क्षेत्रों में कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आगामी दो वर्षों के लिए स्पष्ट विकास रोडमैप तैयार करें और जमीनी स्तर तक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करें।

इस समारोह में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के तहत किए गए सुधारों पर आधारित एक *कॉफी टेबल बुक* का विमोचन किया जाएगा, जिसमें सरकार की नीतिगत दिशा और परिणामों का दस्तावेज़ होगा। राज्य के विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों और आपदा प्रभावित परिवारों को समारोह में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है — ताकि वे स्वयं जनता के बीच अपने अनुभव साझा कर सकें।

मंडी के इस आयोजन ने राज्य की राजनीति में नया विमर्श छेड़ दिया है — एक तरफ सरकार जनता के बीच अपने कार्यों का लेखा-जोखा रख रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा के जनप्रतिनिधि आपदा राहत और रोजगार जैसी बुनियादी मांगों पर खामोश हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सुक्खू का यह कदम जनता की अदालत में विपक्ष की निष्क्रियता को उजागर करने का प्रतीक है।

मंडी का यह आयोजन सुक्खू सरकार के लिए *तीन वर्षों की उपलब्धियों का उत्सव ही नहीं, बल्कि भाजपा की संवेदनहीन राजनीति का प्रतिवाद भी होगा।

मुख्यमंत्री का यह निर्णय बताता है कि सरकार जनता के बीच से जवाबदेही तय करना चाहती है — और जब जनता स्वयं साक्षी बन जाए, तब सत्ता का अहंकार नहीं, सेवा का सत्य ही इतिहास लिखता है।

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