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बंजार (परस राम भारती), करंट न्यूज़ : जिला कुल्लू के उपमंडल बंजार की तीर्थन घाटी में स्थित ग्राम पंचायत पेखड़ी आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है। पांच साल पहले नौहांडा पंचायत से अलग होकर बनी इस नई पंचायत में विकास के नाम पर सिर्फ निराशा हाथ लगी है।

हालात यह हैं कि यहां के बच्चे जर्जर और असुरक्षित स्कूल भवनों के साये में पढ़ने को मजबूर हैं, जबकि सिस्टम सिर्फ कागजी रिपोर्टों में उलझा हुआ है।

पंचायत के अंतर्गत आने वाले राजकीय प्राथमिक पाठशाला पेखड़ी-1 (गांव शालिंगा), राजकीय प्राथमिक पाठशाला पेखड़ी-2 (गांव पेखड़ी) सहित नाहीं स्कूल के भवनों की हालत बद से बदतर हो चुकी है। कई भवन असुरक्षित घोषित हो चुके हैं, लेकिन उन्हें गिराने की प्रक्रिया आज तक धरातल पर शुरू नहीं हो पा रहा।

*पेखड़ी-2 स्कूल में  शौचालय-रसोईघर खंडहर, बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए गांव छोड़ने को मजबूर परिवार*

स्थानीय लोगों के अनुसार, नाहीं, पेखड़ी और शालिंगा के तीनों स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति राजकीय प्राथमिक पाठशाला पेखड़ी-2 की है, जहां अब केवल 8 विद्यार्थी ही बचे हैं।

स्थानीय समाजसेवी यज्ञ चंद जुफरा ने तीखे शब्दों में कहा कि इस स्कूल का भवन संतोषजनक स्थिति में नहीं है। स्कूल के शौचालय और रसोईघर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ऐसे माहौल में बच्चों को सुरक्षित वातावरण देना तो दूर, उनकी जान पर हर रोज खतरा मंडरा रहा है।

स्थानीय निवासी पदम देव, महेश्वर सिंह, गायत्री, यशपाल, इंद्र सिंह, राजू नेगी और संजय नेगी का कहना है कि स्कूलों की इस बदहाली के कारण अभिभावक अपने बच्चों का भविष्य अंधकार में देख रहे हैं। मजबूरी में कई परिवार बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए गांव से बाहर भेज रहे हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। ग्रामीणों का सीधा सवाल है – यदि गांव के स्कूलों में ही सुरक्षित भवन होते, तो उन्हें अपने कलेजे के टुकड़ों को दूर क्यों भेजना पड़ता?

*विकास के दावे खोखले- 5 साल में नहीं बना पंचायत भवन, सड़क-रास्तों की खस्ता हालत ने जिंदगी मुहाल*

ग्रामीणों ने विकास कार्यों की धीमी गति पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी पंचायत भवन का निर्माण कार्य शुरुआती स्तर पर ही अटका हुआ है।

ग्राम पंचायत नौहांडा के पूर्व प्रधान स्वर्ण सिंह ठाकुर ने कहा कि पेखड़ी पंचायत में सिर्फ स्कूल ही नहीं, सड़कों और कच्चे रास्तों की हालत भी दयनीय है। पहाड़ी क्षेत्र में यही रास्ते ग्रामीणों और विद्यार्थियों की जीवन रेखा हैं, लेकिन इनकी बदहाली के कारण लोगों को रोज आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने संबंधित विभागों से मांग की कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस काम होना चाहिए।

*बीपीईओ का रटा-रटाया जवाब -रिपोर्ट भेज दी, अब PWD करेगा कार्रवाई*

इस गंभीर मामले पर खंड प्राथमिक शिक्षा अधिकारी रमेश भारद्वाज ने बताया कि गत वर्ष बंजार क्षेत्र में आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुए 10 प्राथमिक स्कूल भवनों की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है।

वीरवार को बंजार में उपमंडल अधिकारी के साथ बैठक में भी इन समस्याओं पर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त भवनों को गिराने की कागजी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, अब आगे की कार्रवाई लोक निर्माण विभाग को करनी है।

वहीं, ग्राम पंचायत पेखड़ी के उपप्रधान नील चंद ने प्रशासन के इस रवैये पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि केवल रिपोर्ट भेजना पर्याप्त नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी सुरक्षित स्कूल भवन, पर्याप्त कमरे और बेहतर सुविधाएं मिलना उनका अधिकार है। जब तक धरातल पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक समस्याएं जस की तस बनी रहेंगी।

अब पेखड़ी, शालिंगा और नाहीं के ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्द ठोस कदम उठाए जाएंगे और टूटी सड़कों व कच्चे रास्तों की समस्या का भी स्थायी समाधान होगा, ताकि दूरदराज के गांवों के विद्यार्थियों को गांव छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े।

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