शिमला : आर्थिक संकट से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश के सरकारी खजाने को आईएएस अधिकारी किस तरह से लुटा रहे हैं, उसकी बानगी देखने को मिली है। हिमाचल प्रदेश का भू-संपदा नियामक प्राधिकरण (रेरा) के अध्यक्ष रहे और पूर्व मुख्य सचिव रहे श्रीकांत बाल्दी पर बड़े आरोप लगे हैं।
जयराम सरकार में मुख्यसचिव रहे श्रीकांत बाल्दी ने अपने जान पहचान, दोस्तों और नौकरशाहों को हिमाचल प्रदेश से सेब भेजे और उसकी पेमेंट सरकारी खजाने से की गई।
जानकारी के अनुसार, रेरा के चेयरमैन रहते हुए श्रीकांत बाल्दी ने राजस्थान सरकार के एक दर्जन अधिकारियों को रायल सेब की पेटियां भेजी।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 से नवंबर 2024 तक 10 लाख रुपये से अधिक का सेब बांटा गया। इस दौरान केंद्रीय सरकार में तैनात अधिकारियों के घरों तक बाकायदा सरकारी खर्चे पर सेब भेजा गया और बागवानी विभाग के परवाणु दफ्तर से सेब पहुंचाया।
हैरानी की बात है कि सर्वाधिक सेब राजस्थान के आईएएस अफसरों को भेजा गया। क्योंकि श्रीकांत बाल्दी भी राजस्थान के रहने वाले हैं। कागजों से हुए खुलासे में पता चलता है कि हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) के जरिये सेब की खरीद की गई।
फिर रेरा ने निगम को लिखित तौर पर कहा कि इन पतों पर सेब भेजा जाए। इस दौरान रायल और गोल्डन के साथ उच्च गुणवत्ता वाले सेब की सप्लाई की गई। दस्तावेज बताते हैं कि केंद्र में लोकपाल के घर भी पहुंचीं सेब पेटियां भेजी गई।
इसके अलावा, सचिव आवास, नीति आयोग के प्रधान सलाहकार, केंद्र सरकार के 18 अधिकारियों के घरों में उच्च क्वालिटी का सेब भेजा गया। यह भी पता चलता है कि चंड़ीगढ़, पंजाब व हरियाणा के मुख्य सचिवों के घरों में भी सेब भेजा गया।
इसके लिए बाकायदा सरकारी खजाने से साल 2020 में 3.50 लाख रुपये की पैमेंट की गई। इसी तरह वर्ष 2021 में 45 हजार रुपये और 1.25 लाख रुपये, वर्ष 2022 में 44 हजार, 1.25 लाख व 1.69 लाख रुपये, वर्ष 2023 में 2 लाख रुपये और वर्ष 2024 में 1.50 लाख रुपये कीमत का सेब अफसरों के घर तक पहुंचा।
इन अफसरों में राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के सलाहकार, प्रधान सचिव सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, रेरा अध्यक्ष, तीन रेरा सदस्य, पूर्व डीजीपी सहित कई अफसर शामिल थे।
गौरतलब है कि पूर्व की भाजपा सरकार के राज में श्रीकांत बाल्दी मुख्यसचिव रहे हैं।
सूबे में रेरा के पहले अध्यक्ष डॉ. श्रीकांत बाल्दी रहे और उनके अलावा, सेवानिवृत्त आईएईस अधिकारी बीसी बडालिया और राजीव वर्मा रेरा के सदस्य थे। इस पूरे मामले के सामने आने पर बड़े सवाल उठ रहे हैं।
गौरतलब है कि बाल्दी 31 दिसंबर 2019 को मुख्यसचिव के पद से रिटायर हुए थे। तब की जयराम सरकार ने बाल्दी को रिटायरमेंट से पहले ही रेरा चेयरमैन बनाने की मंजूरी दी थी।
पूर्व एडवोकेट जनरल ने उठाए सवाल
वीरभद्र सिंह सरकार में डिप्टी एडवोकेट जनरल और हाईकोर्ट के वकील विनय शर्मा सोशल मीडिया पर लिखते हैं कि दस लाख के सेब सरकारी खजाने से खरीद कर अपने मित्रों को बांटने वाला ये शख्स जब सेक्रेटरी फाइनेंस थे तब गरीब दिहाड़ीदारों, आउट सोर्स एम्प्लॉय और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स की दिहाड़ी नहीं बढ़ने देता था।
कहते थे खजाना खाली है, जब यह शख्स रेरा का चेयरमैन बने तो करोड़ों रुपए अपने ऑफिस की रेनोवेशन के नाम पर उड़ा दिए। जिस आफिस में मैंने डिप्टी एडी काम किया वह ऑफिस रातों रात इतना बेकार हो गया कि उसकी रेनोवेशन के लिए करोड़ों (कम से कम बीस करोड़) की जरूरत आन पड़ी।
विनय ने बड़े आरोप लगाए और कहा कि अब महाराज ने सरकारी खजाने से दस लाख के सेब राजस्थान में बैठे अपने मित्रों को खिला दिए। इन पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। फिर ईडी को प्रॉपर्टी की जांच करनी चाहिए। बाहरी राज्यों से आए इन आईएएस ने प्रदेश को जमकर लूटा। अब भरपाई इन्हीं लोगों की जेब से होनी चाहिए।