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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए मनरेगा जैसी योजनाओं की शुरुआत की, जो न केवल ग्रामीणों को रोजगार प्रदान करती है, बल्कि आर्थिक समानता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम था। कोविड-19 महामारी के दौरान भी यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और मदद का एक स्रोत बनकर उभरी।

मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन एक महान नेता और अर्थशास्त्री के रूप में हुआ। उनके योगदान ने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई। उनकी नीतियों और दूरदर्शिता से देश ने कई महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों को अपनाया। डॉ. सिंह का कार्यकाल और उनकी नैतिकता भारतीय राजनीति में सदैव याद रखी जाएगी।

डॉ. मनमोहन सिंह ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए अनेक ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों की शुरुआत की। चार दशकों तक चली मिश्रित अर्थव्यवस्था ने देश को विकास की धीमी गति पर रखा था, लेकिन डॉ. सिंह के नेतृत्व में 1991 में आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई। इसने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में खड़ा किया और उसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के समकक्ष लाकर खड़ा किया।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए मनरेगा जैसी योजनाओं की शुरुआत की, जो न केवल ग्रामीणों को रोजगार प्रदान करती है, बल्कि आर्थिक समानता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम था। कोविड-19 महामारी के दौरान भी यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और मदद का एक स्रोत बनकर उभरी।

डॉ. सिंह की कूटनीति और डिप्लोमेसी का सबसे बड़ा उदाहरण अमेरिकी परमाणु समझौता था, जो उन्होंने विरोधों के बावजूद सफलतापूर्वक किया। यह एक ऐतिहासिक कदम था, जिसने भारत को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दिलाई।

फूड गारंटी और आरटीआई जैसी योजनाओं ने आम आदमी को अधिकारों से लैस किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि डॉ. सिंह राजतंत्र के बजाय प्रजातंत्र की ताकत में विश्वास रखते थे। इन सुधारों से यह सिद्ध होता है कि डॉ. सिंह का दृष्टिकोण आम लोगों के लाभ और उनके अधिकारों की रक्षा पर आधारित रहा है।

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