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शिमला/नई दिल्ली, करंट न्यूज: नेपाल में प्राकृतिक आपदा के दौरान टनल और बांध क्षेत्रों में हुए भारी नुकसान के बाद केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। हिमालय की गोद में चल रहे बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की सीधी निगरानी में है।

PMO ने हिमाचल समेत सभी हिमालयी राज्यों से मांगी रिपोर्ट

PMO ने हिमाचल प्रदेश सहित सभी हिमालयी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजनाओं और सड़क सुरंगों की सुरक्षा समीक्षा शुरू कर दी है।

राज्यों से विशेष तौर पर पूछा गया है कि पहाड़ों की खोदाई के दौरान हादसों और प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए कौन से सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाए जा रहे हैं।

हाईलेवल वर्चुअल बैठक, हिमाचल से ACS नजीम और प्रधान सचिव देवेश कुमार शामिल

प्रधानमंत्री कार्यालय के सलाहकार तरुण कपूर की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक में संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में टनल निर्माण की स्थिति पर मंथन हुआ।

हिमाचल की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम और प्रधान सचिव देवेश कुमार ने शिमला से हिस्सा लिया। बैठक में नेपाल हादसे के संदर्भ में जोखिम कम करने और आपदा में त्वरित रेस्पॉन्स पर फीडबैक लिया गया।

हिमाचल में दर्जन भर प्रोजेक्ट, फोरलेन की सुरंगें भी जांच के दायरे में

हिमाचल में सतलुज, ब्यास और रावी बेसिन में करीब एक दर्जन छोटे-बड़े बांध और जल विद्युत प्रोजेक्ट चल रहे हैं। कई में पानी की आवाजाही सुरंगों से होती है।

वहीं चंडीगढ़-शिमला और कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर कई सुरंगें बन चुकी हैं, कुछ पर काम जारी है। मटौर-शिमला और पठानकोट-मंडी NH पर भी NHAI टनल बना रहा है।

PMO ने साफ किया है कि हिमालय की जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों में टनल निर्माण को सामान्य काम नहीं समझा जा सकता।

खोदाई से पहले विस्तृत जियोलॉजिकल सर्वे, आधुनिक रॉक सपोर्ट सिस्टम, पानी के रिसाव की निगरानी और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को सख्ती से लागू करना होगा, ताकि भूगर्भीय हलचल का संकेत समय रहते मिल सके और बड़ी दुर्घटना टाली जा सके।

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