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बालीचौकी (मंडी), करंट न्यूज़: प्रशासन का सुस्त रवैया  व फाइलों में धूल फांकती न्याय की गुहार और दबंगों के रसूख के बोझ तले 165 दिन से कराह रही एक गरीब दिव्यांग दलित की आवाज आखिर *RTI के डंडे* ने प्रशासन के बहरे कानों तक पहुंचा ही दी।

7 साल पहले 5 बिस्वा जमीन बेचने वाले जीतराम की शिकायत पर *राजस्व, वन और PWD की संयुक्त टीम* अब मौके पर निशानदेही कर रही है। आरोप है कि खरीददार विजयपाल ने 5 बिस्वा के बदले कई गुना जमीन हड़प ली, जेसीबी से समतल कर रातों-रात सड़क बना दी और सरकारी डंगा भी लगवा दिया।

*‘दफ्तरों की चौखट पर माथा टेककर थक गया था’* 

अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले दिव्यांग जीतराम ने *19 जनवरी 2026* को SDM बालीचौकी को प्रार्थना पत्र देकर निशानदेही और अवैध कब्जा रोकने की गुहार लगाई थी। *फाइल 11 फरवरी को तहसीलदार के पास पहुंची,तो  फिर धूल फांकने लगी।* 5 महीने तक *सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते जब उम्मीद टूट गई*, तो जीतराम ने *RTI एक्टिविस्ट संतराम* का दरवाजा खटखटाया। 

*‘5 बिस्वा का सौदा, कई गुना पर कब्जा’: कैसे रौंदी गई एक गरीब की इज्जत*

शिकायत के मुताबिक, उच्च जाति के प्रभावशाली विजयपाल ने जीतराम से *5 बिस्वा जमीन खरीदी थी*। लेकिन “रसूख के नशे में चूर विजयपाल” ने कई गुना ज्यादा जमीन पर जबरन कई कर लिया। जेसीबी से जमीन समतल की, रातों-रात सड़क बना दी और PWD से सरकारी डंगा लगवा दिया। एक *अपाहिज, बेबस दलित* अपनी ही जमीन पर तमाशबीन बनकर रह गया। 

*हड़कंप: पहुंची ‘भारी-भरकम टीम’* 

उल्लेखनीय है 23 जून को RTI दाखिल होते ही नींद से जागे प्रशासन ने 30 जून शाम 4 बजे कानूनगो, पटवारी, PWD के JE और फॉरेस्ट गार्ड को मौके पर भेजा।

जांच के दौरान जीतराम, वालेराम, आत्माराम के साथ सतीश शर्मा, संतराम और दुले सिंह भी मौजूद रहे। 

*‘जांच टीम को भी फोन पर दबाने की कोशिश’:* संतराम  

*RTI कार्यकर्ता संतराम* ने कहा, “यह सिर्फ जमीन का नहीं, इंसानियत का मामला है। एक गरीब, दिव्यांग, दलित परिवार को सत्ता और रसूख के दम पर बर्बाद किया जा रहा है।” उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि मौके पर जांच करने गई टीम को भी आरोपी विजयपाल ने फोन पर 10-15 मिनट बात करके प्रभावित और दबाव में लेने की कोशिश की। 

*‘CM से मिलेंगे, कोर्ट जाएंगे’: न्याय की जंग जारी* 

संतराम ने “चेतावनी” दी है कि वे जल्द मुख्यमंत्री से मिलकर दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग करेंगे। “अगर फिर भी इस लाचार को इंसाफ नहीं मिला, तो  न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।” एक दिव्यांग की लाठी छीनने वालों को अब कानून का डंडा जरूर बजेगा।

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