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धर्मचंद यादव
कुल्लू


जिला की मणिकर्ण घाटी के वरशैणी में बलीचा कंपनी के बिजली मीटर व बिल में हुये घोटाले के मामले को लेकर अंततः पुलिस में एफआईआर दर्ज हो ही गई। अब पुलिस इस मामले की जांच करेगी। जिससे इस घोटाले में शामिल अधिकारियों का पर्दाफाश होगा।

उल्लेखनीय है कि करंट न्यूज वेब पोर्टल ने इस मामले को प्रमखता से उठाया था। जिसके चलते यह मामला बिजली बोर्ड प्रबंधन व सरकार के समक्ष काफी देर गूंजता रहा। हालांकि बिजली बोर्ड के कुछ अधिकारियों ने इस मामले को दबाने और इसमें शामिल कुछ अधिकारियों को बचाने के हर संभव प्रयास किये।

लेकिन करंट न्यूज ने इस मामले को दबने नहीं दिया और हर स्तर पर इसे बड़ी निडरता के साथ उठाया। उसी का परिणाम है कि अब यह मामला पुलिस तक पहुंच पाया।

गौरतलब है कि बलीचा कंपनी को नियमों को ताक पर रख बिजली मीटर लगाने व बिजली कटने पर उसे फिर नियमों को धता बता कर जोड़ने के मामले मेें तीन जांच कमेटियों ने जेई को पूरी तरह से क्लीन चिट दी है।

जबकि पांच अधिकारियों की जांच कमेटी द्वारा उस समय के एसई राजीव सूद व तीन जांच कमेटियों द्वारा एक्सियन हरेंद्र ठाकुर, एसडीओ शांतिलाल, एक ठेकेदार व कंपनी को दोषी मानते हुये हुये उनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की है।

लेकिन इस पूरे प्रकरण में बिजली बोर्ड प्रबंधन ने जेई पर सारी जिम्मेदारी डालते हुये उसे डिमोट करने के आदेश जारी कर दिये हैं। जबकि जेई देवी सिंह द्वारा ही इस पूरे प्रकरण का खुलासा किया गया और बिजली बोर्ड को नुकसान से बचाया है।

लेकिन इसके बावजूद भी सारे घोटाले का ठिकरा जेई देवी सिंह के सिर फोड़ दिया गया। जबकि जेई देवी सिंह ने इस घोटाले का पर्दाफॉश करते हुये मीटर की एमआरआई करवाई और उसी के आधार पर बिजली बोर्ड को पूर्व में बिजली बिल मिला और एक करोड़ 52 लाख की पैनल्टी बलीचा कंपनी पर तय हुई।

लेकिन मामला जांच के लिये पुलिस के पास पहुंचने से सभी को उम्मीद बंधी है कि अब इस घोटाले में दोषी करार दिये गये अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी और निर्दोष जेई को न्याय मिलेगा।

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