कुल्लू, करंट न्यूज़ डेस्क : बंजार विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 1995-96 के आसपास शुरू हुआ ‘धरती पुत्र’ का राजनीतिक नारा एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय तक बंजार की राजनीति में रूपी क्षेत्र के नेताओं का दबदबा रहा है।
रूपी क्षेत्र का रहा है वर्चस्व
पूर्व विधायक दिले राम शबाब के अलावा महेश्वर सिंह, सत्यप्रकाश ठाकुर, स्वर्गीय कर्ण सिंह और खीमी राम शर्मा जैसे नेता रूपी क्षेत्र से विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
2017 में बदला समीकरण
वर्ष 2017 में भाजपा ने खीमी राम शर्मा के बजाय बंजार क्षेत्र से संबंध रखने वाले सुरेंद्र शौरी को टिकट दिया। शौरी ने जीत दर्ज कर इस बदलाव को नई दिशा दी।
2022 में भी उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। दोनों ही चुनावों में रूपी क्षेत्र में उन्हें कम समर्थन मिला, जबकि बंजार क्षेत्र की बढ़त ही उनकी जीत का आधार बनी।
कांग्रेस की रणनीति पर नजर
अब 2027 के चुनाव को लेकर कांग्रेस की रणनीति पर चर्चाएं तेज हैं। सुक्खू सरकार द्वारा राम सिंह मियाँ को APMC अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनके कद को लेकर अटकलें बढ़ी हैं। इसे विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि कांग्रेस ने अभी कोई आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं किया है।

क्या होगा धरती पुत्र Vs धरती पुत्र?
यदि भाजपा से सुरेंद्र शौरी और कांग्रेस से राम सिंह मियाँ आमने-सामने आते हैं, तो चुनाव का केंद्र फिर ‘धरती पुत्र’ की राजनीति बन सकती है। एक तरफ दो बार के विधायक का अनुभव होगा, दूसरी तरफ पहला विधानसभा चुनाव लड़ने की चुनौती।
रूपी से हितेश्वर फैक्टर भी अहम
इसी बीच रूपी क्षेत्र से हितेश्वर सिंह की भूमिका पर भी सबकी नजर रहेगी कि वे फिर से दांव खेलेंगे या किसी दल के टिकट पर मैदान में उतरेंगे।
कांग्रेस में बंजार से दुष्यंत ठाकुर और सैंज से तेजा ठाकुर, वहीं भाजपा में सैंज से ओमप्रकाश ठाकुर सक्रिय हैं। लेकिन वह भी अभी राजनीतिक ग्रह गोचर देख रहे हैं। आने वाले समय में उनकी दिशा व दशा स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल टिकट का फैसला शीर्ष नेतृत्व को करना है, लेकिन बंजार में चर्चाओं का बाजार अभी से गर्म है। जोड़ तोड़ के साथ साथ अपना अपना वर्चस्व दिखाने के तिकड़म भिड़ाये जा रहे हैं।