कुल्लू, करंट न्यूज़ : जिस उत्सव का देवभूमि के लोगों को साल भर इंतजार रहता है, उसका बिगुल बज गया है। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरे का कर्टेन रेजर का लोकार्पण गुरुवार को अटल सदन कुल्लू में विधायक एवं दशहरा कमेटी अध्यक्ष सुंदर सिंह ठाकुर ने किया।

इस बार देवताओं का यह महाकुंभ 21 से 27 अक्टूबर तक ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में सजेगा। सात दिन तक पूरी कुल्लू घाटी देवमय हो जाएगी।
ये है धार्मिक मान्यता – क्यों है खास?
कुल्लू दशहरा रावण दहन का नहीं, बल्कि भगवान रघुनाथ जी के राजा बनने का उत्सव है। मान्यता है कि 17वीं सदी में राजा जगत सिंह ने अयोध्या से भगवान रघुनाथ जी की मूर्ति लाकर उन्हें कुल्लू का राजा घोषित किया था। तभी से दशहरे पर घाटी के सभी देवी-देवता अपने राजा रघुनाथ जी से मिलने ढालपुर आते हैं।

उत्सव के पहले दिन भगवान रघुनाथ जी की भव्य रथ यात्रा निकलेगी, जिसके साथ ही 300 से अधिक देवी-देवताओं के देवरथ ढालपुर में विराजमान होंगे।
तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार
कर्टेन रेजर आयोजन के दौरान दशहरा कमेटी के उपाध्यक्ष सुरजीत राठौर ने बताया कि इस बार उत्सव को और दिव्य और भव्य बनाया जाएगा। देव संस्कृति, लोक परंपराओं, सांस्कृतिक संध्याओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों का संगम देखने को मिलेगा।

विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रशासन ने सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। इस मौके पर कार्यकारी उपायुक्त एवं दशहरा कमेटी के उपाध्यक्ष सुरजीत राठौर, सहायक आयुक्त डॉ जयबंती ठाकुर, एएसपी मनमोहन शर्मा सहित अनेक अधिकारी व गणमान्य लोग मौजूद रहे।
उल्लेखनीय है कि कुल्लू दशहरा सिर्फ एक मेला नहीं, यह हिमाचल की जीवंत देव संस्कृति का प्रतीक है, जहां देवता, मानव और परंपरा एक साथ नाचते हैं।