डॉक्टर की लापरवाही पर सवाल, परिजनों का आमरण अनशन शुरू, सरकार व प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा रोष
कुल्लू, करंट न्यूज़: एक किलकारी की जगह सन्नाटा, एक नई जिंदगी के आगमन पर मौत का मातम। कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल में 23 साल की नव प्रसूता रजनी शर्मा की सिजेरियन के बाद हुई दर्दनाक मौत ने पूरे जिले को झकझोर दिया है।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग की बेरुखी से आहत हजारों लोगों का सब्र सोमवार को टूट गया। बालीचौकी, सराज सहित पूरे कुल्लू से उमड़े जनसैलाब ने ढालपुर से अस्पताल तक रोष रैली निकालकर व्यवस्था को आईना दिखा दिया।
‘न्याय के लिए सड़क पर परिजन’: मासूम को छोड़ गई रजनी
उल्लेखनीय है कि बीते सप्ताह रजनी शर्मा ने एक नन्ही परी को जन्म दिया, लेकिन ऑपरेशन के बाद रजनी की सांसें थम गईं। एक तरफ नवजात बच्ची मां के आंचल को तरस रही है, दूसरी तरफ परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। परिजनों का आरोप है कि सिजेरियन के दौरान डॉक्टर की घोर लापरवाही ने रजनी की जान ले ली।
सबसे पीड़ादायक पहलू: सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने आज तक आरोपी डॉक्टर पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसी निष्क्रियता ने परिजनों के जख्मों पर नमक छिड़क दिया।

‘ढालपुर से अस्पताल तक आंसू और आक्रोश’: टूट गया गेट, शुरू हुआ आमरण अनशन
आक्रोशित परिजनों के साथ हजारों की भीड़ जिला मुख्यालय पहुंची। ढालपुर से क्षेत्रीय अस्पताल तक निकली रोष रैली में शामिल हर आंख नम थी, हर जुबान पर एक ही मांग थी कि ‘रजनी को न्याय दो, दोषी डॉक्टर को बर्खास्त करो’।
प्रदर्शनकारियों के अस्पताल पहुंचने पर सुरक्षा कर्मियों ने मुख्य गेट बंद कर दिया, लेकिन मां के इंसाफ के लिए उमड़े सैलाब के आगे सारे अवरोध टूट गए। प्रदर्शनकारियों ने जबरन गेट खोलकर अस्पताल परिसर में प्रवेश किया और सरकार व स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
वहीं, अस्पताल परिसर में कई लोग आमरण अनशन पर बैठे हैं। परिजनों ने दो टूक चेतावनी दी है। कि ‘अगर डॉक्टर पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र होगा।’
‘एक मौत, कई सवाल’: क्या सिस्टम के लिए एक मां की जान की कोई कीमत नहीं?
क्या एक प्रसूता की जान इतनी सस्ती है कि सिजेरियन में लापरवाही के बाद भी डॉक्टर कुर्सी पर बना रहे?
जिस नवजात ने जन्म लेते ही मां खो दी, उसके आंसुओं का हिसाब कौन देगा?
क्या ‘बेटी बचाओ’ का नारा सिर्फ कागजों तक सीमित है? जब अस्पताल में ही बेटियां सुरक्षित नहीं हैं।
उल्लेखनीय है कि स्थानीय लोगों के साथ मंडी के सराज क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में लोग इस लड़ाई में शामिल हुए हैं। यह सिर्फ रजनी के परिवार की नहीं, बल्कि हर उस मां की लड़ाई है जो अस्पताल पर भरोसा कर अपनी जान दांव पर लगाती है।
CMO के साथ बैठक जारी, पर उम्मीदें कम
समाचार लिखे जाने तक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रंजीत सिंह की अध्यक्षता में प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक चल रही थी। वहीं, प्रशासन की अब तक की रहस्यमयी चुप्पी ने लोगों का आक्रोश और ज्यादा बड़ा दिया है।
आज आमजन के यही सवाल है कि क्या एक गरीब परिवार की बेटी की मौत पर सिस्टम जागेगा? या फिर ‘लापरवाही’ के नाम पर एक और फाइल बंद कर दी जाएगी? रजनी तो लौटकर नहीं आएगी, लेकिन क्या उसकी मासूम बच्ची को इंसाफ मिल पाएगा?
गौरतलब है कि यह सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक मां की चीख है जो व्यवस्था के बहरे कानों तक पहुंचनी चाहिए।