धर्मचंद यादव, संपादक करंट न्यूज़।
बंजार (कुल्लू) : जिला परिषद चुनाव की हॉट सीट धाऊगी वार्ड की मतगणना पूरी होने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़े भाजपा के वरिष्ठ नेता ओम प्रकाश ठाकुर को बहुमत मिल गया था। जिसकी विधिवत देर रात लगभग 10:30 बजे के आसपास सक्षम चुनाव अधिकारी द्वारा घोषणा की गई।
लेकिन आधी रात नियमों को ताक पर रख कर पुनः मतगणना करवाई गई। जिसमें ओमप्रकाश के 28 वोट कम दर्शाए गए। इस तरह से ओमप्रकाश ठाकुर बहुमत मिलने के बाद भी हार गए या षड्यंत्र के तहत हरवाया गया, इस संदर्भ में सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।
लेकिन जिस तरह से सक्षम चुनाव अधिकारी एसडीएम पर आरोप लग रहे हैं उसमें कहीं न कहीं ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि ओमप्रकाश के साथ जबरदस्त खेला तो हुआ है। अब उस खेला में सक्षम चुनाव अधिकारी के अलावा कौन कौन शामिल हैं या नहीं भी हैं, यह तो गंभीर जांच का मसला है। जो फ़िलहाल याचिका व चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद के नियमों में घुमाई जा रही है।
मगर बहुमत मिलने की आधिकारिक घोषणा मानकर ओमप्रकाश ठाकुर के समर्थकों में प्रसन्नता की लहर दौड़ गई थी और उन्होंने जश्न मनाने की तैयारी शुरू कर दी। हालांकि ओम प्रकाश ठाकुर को सक्षम चुनाव अधिकारी द्वारा उनकी जीत के संदर्भ में कोई प्रपत्र नहीं दिया गया था।
बल्कि उन्हें कहा गया कि जीत के संदर्भ में प्रपत्र थोड़ी देर बाद दिया जाएगा। इसके बाद ओमप्रकाश ठाकुर व उनके काउंटिंग एजेंट मतगणना हाल से बाहर निकल गए। बताया जा रहा है कि इसी दौरान सक्षम चुनाव अधिकारी द्वारा मतगणना कार्य में संलग्न कर्मचारियों को भी भोजन के लिए मतगणना हाल से बाहर भेज दिया गया।
ओम प्रकाश ठाकुर के मुताबिक इसी दौरान उनको चुनावी जीत की प्रक्रिया से बाहर करने के लिए जबरदस्त खेल खेला गया। लगभग दो से अढ़ाई घंटे बाद जब तमाम कर्मचारी भोजन करके वापस मतगणना हाल में पहुंचे तो सक्षम चुनाव अधिकारी एसडीएम ने पुनः मतगणना की घोषणा कर दी।
कहा गया कि कांग्रेस प्रत्याशी द्वारा पुनः मतगणना करने की अर्जी दी गई है। जबकि ओमप्रकाश ठाकुर का कहना है कि एसडीएम ने खुद कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी को पुनः मतगणना करवाने की अर्जी देने को कहा।
लेकिन हैरत इस बात की है कि चुनाव अधिकारी एसडीएम द्वारा चुनाव आयोग के नियमों को धता बताते हुए दो अढ़ाई घंटे बाद दोबारा मत मतगणना करने की इजाजत दी गई। जबकि जांच पड़ताल करने पर पता चला है कि चुनाव आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक मतगणना पूरी होने के बाद 10 मिनट के भीतर पुनः मतगणना करवाने का प्रावधान है और उससे पहले मतगणना में लगा कोई भी कर्मचारी बाहर नहीं जा सकता है।
लेकिन बंजार में चुनाव आयोग के नियमों को दरकिनार करते हुए मनमाने तरीके से लगभग अढ़ाई घन्टे बाद पुनः मतगणना करवाई गई। जिसमें पहले बहुमत में आए ओमप्रकाश ठाकुर के लगभग 28 वोट कम दर्शाए गए।
लेकिन हैरानीजनक पहलू यह रहा कि पहली मतगणना में दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी का एक भी वोट नहीं बढ़ा। मगर पुनः मतगणना में पहले बहुमत हासिल केवल निर्दलीय प्रत्याशी ओमप्रकाश ठाकुर के 28 वोट घट गए। जब ओम प्रकाश ठाकुर ने भी पुनः मतगणना करवाने का आग्रह किया, तो उनके आग्रह को पूरी तरह से ठुकरा दिया गया। इतना ही नहीं बल्कि ओम प्रकाश ठाकुर के मुताबिक उन्हें चुनाव अधिकारी एसडीएम ने पुलिस के द्वारा जबरन मतगणना हाल से बाहर निकलवा दिया गया।
ओमप्रकाश ठाकुर ने आरोप लगाया है कि इस दो अढ़ाई घंटा की अवधि के दौरान कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के तमाम काउंटिंग एजेंट भी बदल दिए गए तथा अनाधिकृत लोगों को मतगणना हाल में आने जाने की इजाजत दी गई। यह भी आरोप लगे हैं कि एसडीएम लगातार फोन पर मतगणना हाल की पूरी जानकारी किसी को देते रहे और पुनः मतगणना के संदर्भ में भी किसी से लगातार चर्चा करते रहे।
हालांकि ओमप्रकाश ठाकुर ने उपायुक्त से मिल कर इस संबंध में तुरंत कार्रवाई करने का आग्रह किया था।उन्होंने मांग कि थी कि मतगणना केंद्र के तमाम सीसीटीवी की फुटेज संरक्षित करने के साथ ही उसे सार्वजनिक किया जाए और मतगणना पुनः किसी अन्य अधिकारी की मौजूदगी में करवाई जाए। इसके साथ ही उन्होंने एसडीएम व कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ़ कार्रवाई की भी मांग की है।
लेकिन उपायुक्त ने फिलहाल उनकी सब मांगों पर पानी फेरते हुए साफ कर दिया कि मतगणना नियमों के तहत हुई है। आपत्ति दर्ज करवाने वाला पक्ष चुनाव अधिनियम के तहत याचिका दायर कर सकता है। इसका मतलब साफ है कि अब ओमप्रकाश को न्याय के लिए लंबे समय तक भटकना पड़ेगा।
जबकि जांच पड़ताल करने पर एक बात पूरी तरह से स्पष्ट हुई है कि बंजार में मतगणना के दौरान चुनाव आयोग के नियमों की पूरी तरह से धज्जियां उड़ाई गई और ओमप्रकाश को हराने के लिए बड़े स्तर पर षड्यंत्र रचा गया है। जिसमें एसडीएम व अन्य लोगों के शामिल होने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
चुनाव से जुड़े विभिन्न अधिकारियों से भी चर्चा करने पर एक बात पूरी तरह से स्पष्ट हुई है कि निश्चित तौर पर इस मतगणना में गड़बड़ी हुई है। अगर गड़बड़ी नहीं हुई होती तो ओमप्रकाश द्वारा पुन मतगणना की अर्जी को खारिज नहीं किया जा सकता था। क्योंकि चुनाव आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया के लिए चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों की संतुष्टि बेहद आवश्यक है।
लेकिन बंजार में सक्षम चुनाव अधिकारी एसडीएम द्वारा खासतौर पर पहले बहुमत हासिल प्रत्याशी के पुनः मतगणना करवाने के आग्रह को खारिज करना और उन्हें पुलिस बल के द्वारा मतगणना केंद्र से बाहर निकलवाना, अढ़ाई घंटे बाद पुनः मतगणना करवाना तथा मतगणना केंद्र में अनावश्यक लोगों की आवाजाही पूरी तरह से इस तरफ संकेत करती है कि इस मामले में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है, जिसकी जांच बेहद आवश्यक है।
चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न अधिकारियों व कर्मचारियों का भी यही कहना है कि अगर गड़बड़ी नहीं हुई है तो जांच करवाने या पुनः मतगणना करवाने में क्यों आनाकानी की गई?
कल भी जारी……