शिमला : हिमाचल कांग्रेस की पुरानी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के रोहड़ू दौरे के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अनदेखी पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने बिना नाम लिए मुख्यमंत्री को निशाने पर लेते हुए कहा कि यह काफी छोटी सोच को दर्शाता है।
दरअसल, हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ऊपरी शिमला के दौरे पर गए थे। इस दौरान रोहड़ू में लगे पोस्टरों में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को जगह नहीं मिली और ना ही उनके योगदान को याद किया गया। इसी बात पर कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह की माता प्रतिभा सिंह ने सवाल उठाए हैं।
‘वीरभद्र को गुजरे अभी अधिक समय नहीं हुआ’
मंगलवार को प्रतिभा सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह को गुजरे अभी अधिक समय नहीं हुआ है। ऐसे में रोहड़ू जैसे क्षेत्र में उन्हें इतनी जल्दी भुला दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह जैसी शख्सियत को कार्यक्रम में याद तक नहीं किया गया। सभी लोगों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि रोहड़ू में आज क्या हो रहा है।
कांग्रेस नेताओं से भी गिला
प्रतिभा सिंह ने कहा कि औरों से तो क्या उम्मीद रखनी, अपने ही लोग आगे आ जाते और बोलते कि 20 पोस्टर हम लगा लेते हैं। एनएसयूआई के अध्यक्ष मनीष ठाकुर का भी संबंध रहा है और ऐसे में कांग्रेस की विचारधारा ऐसी नहीं रही कि गुटबाजी और एक-दूसरे को बांटे। लोगों को भी देखना चाहिए था कि हम इतनी जल्दी वीरभद्र सिंह को भूल गए। यह दुर्भाग्य की बात है। मुझे सभी कांग्रेसी नेताओं से गिला है।

प्रतिभा सिंह ने कहा कि मैं सिरमौर जाती थी तो मीटिंग में यशवंत सिंह परमार का नाम लेती थी। वह हमारे आदरणीय हैं और उन्हें सम्मान देना हमारा कर्तव्य है। गौर रहे कि वीरभद्र सिंह छह बार हिमाचल के मुख्यमंत्री रहे और रोहड़ू से 1990 से 2007 तक वह विधानसभा चुनाव लड़े और जीते।
सुक्खू-वीरभद्र में रहा है 36 का आंकड़ा
गौर रहे कि मुख्यमंत्री सुक्खू और वीरभद्र सिंह में हमेशा ही 36 का आंकड़ा रहा था। 2012 में सुक्खू को कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन वीरभद्र सिंह उनके खिलाफ थे। कई बार सार्वजनिक मंचों पर दोनों के मतभेद देखने को मिले थे। वीरभद्र सिंह अक्सर मंच पर उनको अपमानित करने से भी परहेज नहीं करते थे। इतना ही नहीं, बल्कि सुक्खू को अध्यक्ष पद से हटाने के लिए भी उन्होंने एड़ी-चोटी का जोर लगाया था, लेकिन हटा नहीं पाए थे।