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कुल्लू, करंट न्यूज़ : संत निरंकारी मिशन की सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के कुल्लू आगमन पर न केवल कुल्लू, बल्कि संपूर्ण हिमाचल प्रदेश भक्तिमय माहौल में डूब गया है।

वहीं, जिला मुख्यालय पर स्थित ढालपुर मैदान संत निरंकारी मिशन के अनुयायियों की साधना स्थली में तब्दील होने लगा है।

समूचे उत्तर भारत से संत निरंकारी मिशन के अनुयायियों का ढालपुर में आगमन शुरू हो चुका है। वहीं, मिशन के स्वयंसेवक व अनुयायी इस साधना स्थली को बेहद सुंदर व मनोरम प्रारूप देने में जुटे हुए हैं, जो लगभग अंतिम चरण में है।

माना जा रहा है कि संत निरंकारी मिशन का यह समागम संभवत कुल्लू जिला में पहली बार इतने विशाल स्तर पर आयोजित हो रहा है। जिसमें हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ जम्मू कश्मीर व अन्य राज्यों से भी भारी संख्या में अनुयायियों के पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि अनुयायियों के पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है।

जबकि, सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज 28 अप्रैल को कुल्लू में पदार्पण करेगी। उनके देवभूमि कुल्लू आगमन पर उनके अनुयायी बेहद उत्साहित हैं और वह इस समागम को पूरी तरह से अविस्मरणीय बनाने में जुट गए हैं।

उल्लेखनीय है कि 28 अप्रैल से 3 में तक आयोजित इस कार्यक्रम में खास तौर पर युवाओं को जीवन से संबंधित महत्वपूर्ण आध्यात्मिक व सांसारिक विधियों से अवगत करवाया जाएगा। इसके साथ ही समागम में आए हजारों अनुयायी सतगुरु सुदीक्षा जी महाराज के प्रवचनों से भी निहाल होंगे

कौन है सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज संत निरंकारी मिशन की छठी और वर्तमान आध्यात्मिक प्रमुख हैं। इन्होंने 17 जुलाई 2018 को माता सविंदर कौर जी के बाद पदभार संभाला है।

माता सुदीक्षा जी महाराज बाबा हरदेव सिंह जी की सबसे छोटी पुत्री हैं। वे आमजन को अपने धैर्य और रूहानी संदेशों से मानवता और ईश्वर के मिलन का मार्ग दिखा रही हैं।

सतगुरु माता सुदीक्षा जी का जीवन परिचय

माता सुदीक्षा जी महाराज का जन्म 13 मार्च 1985 को हुआ था। उनके पिता बाबा हरदेव सिंह जी और माता सविंदर कौर जी, दोनों ही मिशन के पूर्व प्रमुख रहे हैं। वे तीन बहनों में सबसे छोटी हैं।

उन्होंने मनोविज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। बचपन से ही वे आध्यात्मिक ज्ञान, धैर्य और सेवा भाव की ओर प्रवृत्त रहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि 17 जुलाई 2018 को माता सविंदर हरदेव जी ने इन्हें संत निरंकारी मिशन की छठी गुरु के रूप में मनोनीत किया। माता सुदीक्षा जी महाराज ने दुनिया भर में रूहानियत (आध्यात्मिक ज्ञान) और इंसानियत के संगम पर जोर दिया है। उनके अनुसार, ब्रह्मज्ञान के माध्यम से ही आत्मा अपने मूल स्वरूप को जान सकती है और जीवन सुखी हो सकता है।

उनके नेतृत्व में निरंकारी मिशन मानवता की सेवा और रूहानी जागरूकता के अपने कार्यों को जारी रखे हुए है। जिससे आमजन के जीवन में भारी बदलाव आया है।

उनके अनुयायियों की संख्या देश विदेश में लगातार बढ़ती जा रही है। जो पूरी तरह मानव सेवा के लिए समर्पित रहते हैं।

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