कुल्लू, करंट न्यूज़ : मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के ऐतिहासिक व धार्मिक दर्शन के लिए 6 अप्रैल को कला केंद्र कुल्लू में एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जहां पर सोमनाथ ज्योतिर्लिंगों के साक्षत दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होगा।
इतिहास साक्षी है कि सोमनाथ महादेव भू स्पर्श नहीं करते थे, शिवलिंग धरा को छुए बिना उपर रहता था। चमत्कार तो यह हैं कि महमूद गजनवी शिवलिंग को तो खंडित कर पाया लेकिन उसकी अद्भुत शक्ति को उस चुंबकीय तत्व को नष्ट नहीं कर पाया।
आज भी शिवलिंग में वह तत्व विद्यमान हैं जो परस्पर आकर्षित होते हैं, सभी पाठक भक्त जरूर दर्शन करें एवं उस पल के साक्षी बनें, जब यह शिवलिंग सौराष्ट्र में पुनः स्थापित होंगे।
आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर ने सोमनाथ मंदिर में प्राचीन खंडित शिवलिंग की पुनर्स्थापना की पहल की है। यह अवशेष, जो 1000 वर्षों से संरक्षित थे, को अब फिर से स्थापित किया जाएगा।
इस ऐतिहासिक अवसर के लिए पवित्र अवशेषों की भारत भर में यात्रा आयोजित की जा रही है, जिसमें सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा भी शामिल होगी, ताकि भक्त इन ऐतिहासिक अवशेषों के दर्शन कर सकें।
वैज्ञानिक हैरान रह गए, क्योंकि उन्होंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा था। यह और भी दिलचस्प हो जाता है। क्योंकि पृथ्वी पर इस संरचना वाला कोई भी पदार्थ चुंबकीय गुण प्रदर्शित नहीं करता है। प्राचीन भारतीय ग्रंथों में ऐसे पदार्थ का वर्णन मिलता है—जो वास्तव में अंतरिक्ष से आया था।
प्राचीन हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, सोमनाथ मंदिर कोई साधारण मंदिर नहीं था। यह पहला ज्योतिर्लिंग था, जो भगवान शिव को समर्पित बारह पवित्र तीर्थों में सबसे पवित्र है और कहा जाता है कि इसका निर्माण सत्ययुग में स्वयं चंद्र देव सोम ने करवाया था।
इस ऐतिहासिक ज्योतिर्लिंग यात्रा का अपने परिवार सहित हिस्सा बनें और दिव्य दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त करें।