शिमला : हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बरामद एक करोड़ की एलएसडी तस्करी के मामले में शिमला पुलिस की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीआईडी ने एसटीएफ के चार पुलिस कर्मचारियों को निलंबित करने के बाद वीरवार को इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार कर्मचारियों में दो हेड कांस्टेबल और दो कांस्टेबल शामिल हैं।
एएसपी मुख्यालय अभिषेक ने इस संबंध में मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए कहा कि जांच में सामने आया की एलएसडी के खेप की तस्करी की वारदात संदीप की ओर से कुल्लू जिले में अंजाम दी गई। एसटीएफ में कार्यरत 4 पुलिसकर्मियों मुख्य आरक्षी राजेश, मुख्य आरक्षी समीर, मानक मुख्य आरक्षी नितेश और आरक्षी अशोक कुमार की ओर से इस तस्करी को रोकने के बजाय कुछ आरोपियों के साथ मिलकर नशा तस्करी को बढ़ावा दिया।
इन कर्मचारियों की संलिप्तता के चलते शिमला पुलिस की जांच के बाद इन्हें निलंबित किया गया। आज आरोपी कर्मियों को पुलिस की ओर से गिरफ्तार किया गया और कल कोर्ट में पेश किया जाएगा।
शिमला पुलिस और सीआईडी दोनों अपने-अपने स्तर पर इसकी जांच कर रही है। अभी तक जांच में पता चला है कि आरोपी शिमला से पहले एलएसडी को कुल्लू में बेचने के लिए पहुंचे थे। निलंबित चारों कर्मचारी भी कुल्लू में ही तैनात थे। इसके बाद आरोपी कुल्लू से शिमला पहुंचे। यहां पर बीसीएस में एक कमरे में ठहरे थे।
गुप्त सूचना के आधार पर शिमला पुलिस के स्पेशल सेल की टीम ने कमरे में दबिश देकर संदीप शर्मा और प्रिया शर्मा को गिरफ्तार किया। इनके पास तलाशी के दौरान 562 स्ट्रीप वजन में 11.570 ग्राम एलएसडी बरामद की गई।
जांच के बाद मामले में पुलिस ने हरियाणा के गुरुग्राम से केरल के कालीकट निवासी नविएल हैरिसन को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि संदीप और नविएल हैरिसन लंबे समय से एक दूसरे के संपर्क में थे और एलएसडी की तस्करी में कर रहे थे। पुलिस इस मामले की बड़ी ततपरता व गंभीरता से से जांच कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय मे इस मामले में बड़े खुलासे हो सकते हैं।