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कुल्लू, धर्मचंद यादव : हिमाचल प्रदेश में सियासी तौर पर तीसरे राजनीतिक विकल्प की आहट सुनाई देने लगी है। जिसके आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश की राजनीति में बड़ा उलट फेर होने की संभावना बनी हुई है।

गौरतलब है कि पिछले दिन कुल्लू जिला में हिमाचल प्रदेश के भाजपा और कांग्रेस के लगभग दो दर्जन नेताओं ने गुप्त बैठक करके नए राजनीतिक विकल्प पर गंभीर मंथन किया। जिसमें लगभग 12 पूरा विधायकों के शामिल होने की जानकारी भी मिली है।

हालांकि आधिकारिक तौर पर यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि भाजपा कांग्रेस के नाराज नेताओं की यह बैठक जिला के किस स्थान पर हुई है। लेकिन सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि बैठक बंजार विधानसभा क्षेत्र के एक शांत इलाके में हुई है।

बैठक के संदर्भ में एक पूर्व विधायक ने करंट न्यूज़ को बताया कि उन्हें बैठक के संदर्भ में फोन आया था। लेकिन वह बैठक में शामिल नहीं हुए हैं। फिलहाल इस बैठक को लेकर मीडिया और राजनीतिक क्षेत्र में पूरी तरह से हलचल मची हुई है।

मिली जानकारी के मुताबिक इस बैठक में शामिल होने वाले लगभग 35 लोगों की सूची बनी थी। जिसमें 22 के आसपास लोग पहुंचे थे। जिनमें 12 पूर्व विधायक बताए जा रहे हैं। इसके अलावा चार सांसद इस पूरी बैठक को कोऑर्डिनेट कर रहे थे।

बताया जा रहा है कि दोनों पार्टियों यानी कांग्रेस और भाजपा के वह लोग शामिल थे। जो या तो पूर्व में विधायक रहे हैं या उनको लगता है कि शायद उनकी टिकट किसी और को चली जाएगी।

बताया जा रहा है कि कुल्लू जिला में जो मीटिंग हुई है, इसमें कुल्लू जिले के तीन लोग शामिल थे। जिसमें एक पूर्व विधायक शामिल हैं। मंडी से 6 लोग हैं, जिनमें दो पूर्व विधायक हैं। शिमला किन्नौर व लाहुल से 6 लोग शामिल हुए, जिनमें 4 पूर्व विधायक हैं।

जबकि सोलन व सिरमौर से चार लोग शामिल हुए थे जिसमें दो पूर्व विधायक हैं। ऊना से दो लोग शामिल हुए थे।

हमीरपुर से तीन में से दो पूर्व विधायक हैं। कांगड़ा से 6 में से चार पूर्व विधायक है। चंबा से तीन लोग शामिल हुए, इनमें से एक पूर्व विधायक है। बिलासपुर से भी दो लोग शामिल हुए, जिनमें से एक पूर्व में विधायक रह चुका है।

बताया जा रहा है कि इस बैठक में तय हुआ कि आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश में तीसरे राजनीतिक विकल्प के तौर पर “हिमाचल बचाओ पार्टी” का गठन किया जाएगा। सभी लोग अपने-अपने स्तर पर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। हालांकि अभी कुछ कहा नहीं है कि इस बैठक के नतीजे आने वाले समय में क्या निकालते हैं।

लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि जिस तरह से कांग्रेस और भाजपा के नाराज पूर्व विधायकों की कुल्लू जिला के संभवत बंजार विधानसभा क्षेत्र में हुई इस बैठक के नतीजे आने वाले समय में प्रदेश के राजनीतिक समीकरण पर गहरा असर डाल सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश में पूर्व में स्वर्गीय पंडित सुखराम ने तीसरे मोर्चे के तौर पर हिमाचल विकास कांग्रेस का गठन किया था। उन्होंने प्रदेश में भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। जिसमें प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री बने थे।

हालांकि दूसरी बार भी भाजपा ने हिमाचल विकास कांग्रेस के साथ सरकार बनाने का प्रयास किया था। लेकिन पंडित सुखराम ने किन्ही कारणों से पार्टी को पूरी तरह से खत्म कर दिया था। इसके बाद ही हिविन्का से जीते हुए कुछ विधायकों ने भाजपा का पल्ला थाम लिया था।

उसके बाद प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे महेश्वर सिंह ने भी तीसरा राजनीतिक मोर्चा खड़ा करने का प्रयास किया था। उन्होंने हिलोपा का गठन करके प्रदेश में भाजपा का ही सुपड़ा सब किया था। चुनाव में केवल वह खुद का ही चुनाव जीत पाए थे।उसके बाद ही हिलोपा की पूरी तरह से डिब्बा बंद पार्टी हो गई।

हालांकि अभी कहा जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र कांग्रेस के नाम से तीसरे राजनीतिक मोर्चे के तौर पर पार्टी का गठन हो सकता है। लेकिन इससे संदर्भ में खुलकर कोई भी चर्चा नहीं कर रहा है।

ऐसे में हिमाचल प्रदेश के कांग्रेस व भाजपा के कुछ पूर्व विधायकों द्वारा एक बड़ी बैठक का आयोजन निश्चित तौर पर प्रदेश की राजनीति में खलबली मचाएगी।

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