बुरा न मानो होली है बुरा न मानो होली है
तुलु/छिमला, फ्रंट व्यूज : बुधवार तड़के एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के चलते मंत्रिमंडल में फेरबदल हुआ। जिसमें धनीराम शांडिल को राज्यसभा भेजने का फैसला हुआ। तो कुलदीप पठानिया को स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया। जबकि मंत्री के खाली एक पद पर लाहुल स्पीति की विधायक अनुराधा राणा को समाज कल्याण मंत्री की शपथ दिलाई गई।
हालांकि पिछले दिनों मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा सत्र के दौरान गज बज कर ऐलान किया था कि कुल्लू के विधायक सुंदर ठाकुर जल्द मंत्री बनेंगे। लेकिन बदले घटनाक्रम को देखते हुए सुखविंदर सिंह सुक्खू अब सुंदर ठाकुर को मंत्री बनने से पूरी तरह से मुकर गए हैं। उनका कहना है कि सुंदर ठाकुर बिना मंत्री बने भी मंत्री के बराबर सक्षम है।

ऐसे में लाहुल स्पीति से पहली बार कांग्रेस के टिकट पर जीती महिला विधायक अनुराधा राणा की लॉटरी लग गई। मुख्यमंत्री ने उन्हें बुधवार तड़के ब्रह्म मुहूर्त में शपथ दिलाने के बाद मुंह अंधेरे में लाहुल स्पीति के लिए रवाना कर दिया।
बताया जा रहा है कि अनुराधा राणा के स्वागत में सुंदर ठाकुर बजौरा में उनकी आव भगत करेंगे। जबकि पुराने कांग्रेसी पर अब भाजपाई रवि ठाकुर अटल टनल के मुहाने पर उनको खतक पहना कर स्वागत करेंगे।

कुल्लू फ्रेश क्लब अध्यक्ष की कमान मोर सिंह खुजारी को
उधर कुल्लू फ्रेश क्लब के लंबे समय से चले घमासान के बीच अचानक क्लब के प्रशासक व शिकायतकर्ताओं ने गोपनीय बैठक करके युवा पत्रकार मोर सिंह खुजारी को फ्रेश क्लब अध्यक्ष की कमान सौंप दी है। जबकि ओम भोट को क्लब के रात कोष की जिम्मेदारी सौंपी है।

फिलहाल गंभीर फैसला लिया कि जब तक क्लब की फाइनेंशियल जांच में क्लीन चिट नहीं मिल जाती है तब तक पुराने अध्यक्ष को ससम्मान क्लब के धरातल मंजिल में आसन स्थाई तौर पर दे दिया जाएगा। ताकि वह वहां से अपनी सत्ता चला सके।
इस बीच घुमंतू सूत्रों से पता चला है कि बर्खास्त क्लब की पुरानी कार्यकारिणी के अवैध घोषित पदाधिकारी फाइनेंशियल जांच को दबाने की कवायद में लगे हुए हैं।
लेकिन शिकायतकर्ता भी किसी से काम नहीं है उन्होंने भी क्लब की फाइनेंशियल जांच करवाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रखा है। फिलहाल देखना यह है कि यह प्रशासनिक निर्णय कितना कारगर साबित होता है।
सेहरा तो लगा दिये लेकिन कंग्रेस के दूल्हे बिना बाराती ही रह गए
कांग्रेस ने न केवल कुल्लू बल्कि पूरे हिमाचल में जिला स्तर पर दूल्हे को तैयार कर लिये, लेकिन उनके साथ बाराती ही हैं मिल पा रहे हैं। हालांकि कांग्रेस को दूल्हे ढूंढने में भी साल डेढ़ साल से ज्यादा का समय लग गया। उसके बाद अब दूल्हे की बारात सजाने के लिए बाराती ही नहीं मिल पा रहे हैं।

ऐसे में राजनीतिक दल के दूल्हे लंबे समय से बिना बाराती इधर-उधर लुढ़क रहे हैं। न तो उनकी कोई पूछ हो रही है और ना ही उनको पूछने वाला है। उनकी स्थिति ऐसी हो गई है कि आगे दौड़ पीछे किसी चौड़। लगातार बारातियों के इंतजार में इन को पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में दुर्गति का सामना करना पड़ेगा।
हमीरपुरी छोकरे से भयभीत मेरी मंडी के नेता
मेरी मंडी कहने वाले नेता हमीरपुरी छोकरे से बुरी तरह बिदक जाते हैं। कहते हैं सांप का कांटा रस्सी से भी डरता है यही हाल पिछले चुनाव में मेरी मंडी का दावा ठोकने वाले नेता का भी है।

वह हमीरपुर के एक छोकरे से ऐसे ख़ौफ़ज़दा हैं कि उनका नाम सुनते ही उनका ब्लड प्रेशर इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि उन्हें यह भी पता नहीं चल पाता है कि वह किसके लिए क्या कह रहे हैं न उन्हें अपने पद की गरिमा का ध्यान रहता है और न ही वह अपने पूर्व के पद की गरिमा का सम्मान बनाए रख पाते हैं।
हालांकि हमीरपुर का छोकरा भी उन्हीं के दल का है। अगर उनके सम्मान में उनके ही कार्यकर्ता छिटपुट नारेबाजी कर देते हैं, तो मेरी मंडी के नेता इस तरह के मामलों को हल्के से लेने की क्षमता रखनी चाहिए। क्योंकि वह प्रदेश के मुखिया रहने के साथ ही उनका रुतबा भी काफी बड़ा रहा है।

ऐसे में अपने से बहुत छोटी उम्र के पार्टी कार्यकर्ता/नेता को अपने साथ लेते हुए अपना बड़पन दिखाना चाहिए। लेकिन हमीरपुर के छोकरा से इतने भयभीत हो जाते है कि वह उनका नाम सुनते ही विदक पड़ते हैं, जो उनके रुतबे से कताई मेल नहीं खाता है।
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