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शिमला : तो अब प्रदेश में स्थापित जलविद्युत परियोजनाएं राज्य सरकार का खजाना भरेंगी। प्रदेश की 191 परियोजनाओं से लगभग 2 हज़ार करोड़ की आमदनी होगी।

उल्लेखनीय है कि हिमाचल में 10 साल से स्थापित विद्युत परियोजनाओं पर भू-राजस्व लगेगा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की घोषणा के बाद वीरवार को राजस्व विभाग ने इस बाबत अधिसूचना जारी कर दी है।

ऐसे में बिजली उत्पादकों को यह शुल्क साल में दो बार अप्रैल और अक्तूबर में दो किस्तों में देना होगा। 2 फरवरी, 2026 से इसकी वसूली की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश में 191 परियोजनाएं स्थापित हैं। जिला चंबा में सबसे ज्यादा 45 परियोजनाएं स्थापित हैं, जबकि सोलन जिले में सबसे कम एक परियोजना है। हिमाचल का राजस्व बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया है।

केंद्र सरकार से हिमाचल को मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान(आरडीजी) बंद होने पर सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया है। छोटे प्रोजेक्ट पर एक फीसदी, जबकि बड़ी परियोजनाओं पर औसत मार्केट मूल्य का दो फीसदी भू-राजस्व लगेगा।

ऐसे होगी वसूली

इससे सरकार को हर साल दो हजार करोड़ रुपये के करीब कमाई होगी। बड़ी परियोजना बीबीएमबी से 450 और एसजेवीएनएल से 300 करोड़ रुपये हर साल भू-राजस्व प्राप्त होगा।

इससे पहले भी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी। इसमें भी भू-राजस्व को बारे में चर्चा की गई थी। अधिसूचना में कहा गया है कि जमीन का मालिकाना हक यदि प्रोजेक्ट के पास नहीं है तो भी भू-राजस्व देना होगा। बाजार मूल्य के हिसाब से यह वसूली होगी।

प्रदेश में 14.24 करोड़ की बाजार मूल्य वाली परियोजनाओं पर 1 फीसदी, 14.84 से 37.1 परियोजना पर 1.50, 37.1 करोड़ से 185.50 करोड़ वाली परियोजना पर 1.78 और 185.50 करोड़ से अधिक वाली परियोजनाओं पर 2 फीसदी भू-राजस्व लगेगा।

जिला किन्नौर में 22, शिमला में 30, बिलासपुर दो, सोलन एक, सिरमौर पांच, लाहौल-स्पीति तीन, कुल्लू35, चंबा 45, कांगड़ा 38 और मंडी में 10 विद्युत परियोजनाएं स्थापित हैं।

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