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सुसंस्कृति परिहार

यूं तो इस समय शीर्ष पर बैठे हमारे कथित लोकप्रिय नेता अमेरिका में एक अय्याशी के विवाद से लेकर अपने मुख्यमंत्री काल में एक युवती की दीवानगी के निरंतर आ रहे मामले से परेशान हैं।

कहा जा रहा है दोस्त मिस्टर डोनाल्ड ट्रम्प इस फ़ाइल को 19 दिसम्बर को ओपन करने जा रहे हैं। कतिपय लोग कयास लगा रहे हैं साहिब जी इस्तीफा देंगे और भाजपा कार्यकारी अध्यक्ष की तरह जेन जेड कोई नया चेहरा उनकी जगह लेगा। लेकिन इसकी कोई गुंजाइश भाजपा के आचरण में संभव नहीं दिखती है।

इस तरह कई मामले उनके यहां दफ़न हैं जिनका ज़िक्र नहीं होता। नागपुर से निकले लगभग 60 फीसदी कथित देश भक्त स्त्रियों से नफ़रत का मंत्र लेकर निकलते हैं लेकिन उनकी वासना की शांति गुपचुप कब कहां हो जाए कहा नहीं जा सकता। वे कोमल प्यारे बच्चों को भी नहीं छोड़ते।

चूंकि शारीरिक नियम के विरुद्ध उन्हें तैयार किया जाता है किंतु प्रकृति प्रदत्त वासना उन पर सर्वाधिक हावी होती है। यह कुदरत का नियम है जहां जोर जबरदस्ती होती है वहां इसका प्रस्फुटन चोरी छिपे होता ही है।

यह नियम आम आदमी से लेकर शीर्ष पर बैठे लोगों तक को अपनी चपेट में ले लेता है। वे दोषी बनाए जाते हैं। हालांकि इसे वे गंभीरता से नहीं लेते।

कुल मिलाकर देश इस वक्त ऐसे लोगों की सरदारी में है। इसलिए ऐसी घटनाएं मायने नहीं रखतीं। अब आते हैं नीतीश कुमार जो बिहार के पुराने भाजपा संरक्षित मुख्यमंत्री हैं उन्होंने एक शासकीय कार्यक्रम में एक नवागत चिकित्सक नुसरत को उनका नियुक्ति पत्र देते हुए ऐसी हरकत कर दी जिस घटना पर लोग थूक रहे हैं।

हुआ यूं कि हिजाब पहने ये डॉक्टर जैसे ही माननीय के करीब प्रमाण पत्र लेने आई उन्होंने उसका हिजाब अपने पावन कर कमल से खोलकर सुखद अनुभूति के साथ मुस्कराए साथ ही मंच पर मौजूद लोग इस शर्मनाक हरकत पर अट्टहास किए।

खैरियत रही इस शर्मिंदगी का जवाब नुसरत ने तुरंत तमाचा जड़कर नहीं दिया लेकिन उसका चेहरा आक्रोश में था। इस बेहूदगी के आलम में सम्राट चौधरी जो उपमुख्यमंत्री हैं और नीतीश के पीछे खड़े थे उन्होंने नीतीश का कुर्ता भी खींचा लेकिन सत्ता के मद में चूर नीतीश पर कोई असर नहीं हुआ।

अब तरह-तरह की सफाई पेश की जा रही है कोई बाप बेटी की नज़र से देख रहा है तो कोई इसे उनकी सनक बता रहा है। ये सब झूठ है।सत्ता सुख ने उन्हें रंगीन मिज़ाज बना दिया है। वे भी लंबे अर्से से स्त्री सुख से वंचित हैं।

यहां यह भी सोचना चाहिए नुसरत की जगह यदि कोई घूंघट वाली शर्मीली नीलिमा होती तो क्या अब तक बिहार वासी शांत रह जाते। जिस तरह से मंच पर हंसी हुई वह महिला अपमान का पुख्ता सबूत है। नुसरत को नौकरी करनी है इसलिए वह सह गई।

क्या यह हिंदुस्तानी तहज़ीब है। सनातनी सरकार का नमूना है। इस बात को यदि हल्के रुप में लिया जाता है तो यह बहन बेटियों के मान सम्मान के लिए घातक होगा। बुड्ढा सठिया गया से काम चलने वाला नहीं है। महिलाएं प्रतिकार करें। नीतीश कुमार और मंच पर हंसने वाले सार्वजनिक तौर पर माफ़ी मांगे। क्योंकि इस अपमान पर उन्हें सज़ा मिलनी मुश्किल है।

(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)

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