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शिमला/कुल्लू, करंट न्यूज़ : राजस्व कर्मचारियों को स्टेट कैडर की जारी अधिसूचना रद्द करने की मांग पर शुक्रवार से प्रदेश भर के पटवारी-कानूनगो ने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया। जबकि इससे पहले पटवारी व कानूनगो दो दिन की मास कैजुअल लीव पर थे, जिस कारण राजस्व सेवाएं पहले ही प्रभावित हो रही थीं।

हालांकि इस बीच सरकार ने सेवानिवृत्त पटवारी एवं कानूनगो की सेवाएं लेने का निर्णय लिया है, लेकिन इनकी संख्या कम होने के कारण व्यवस्था चरमराकर रह गई है। इसके चलते ऑनलाइन कार्य जैसे हिमाचली प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, कृषक प्रमाण पत्र और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्रों काम नहीं हो रहा है। इसके अलावा रजिस्ट्रियां, इंतकाल, ऋण और ई-केवाईसी प्रक्रिया ठप्प पड़ी है।

इस बीच हिमाचल प्रदेश संयुक्त पटवारी एवं कानूनगो महासंघ के राज्य प्रधान सतीश चौधरी की अध्यक्षता में हुई प्रदेश स्तरीय बैठक में आंदोलन को जारी रखने का निर्णय लिया गया है। इसमें सभी जिला के प्रधान एवं अन्य पदाधिकारी शामिल हुए।

स्टेट कैडर की अधिसूचना जारी कर सरकार ने किया विश्वासघात

बैठक के बाद महासंघ के नेताओं ने सरकार पर स्टेट कैडर की अधिसूचना को जारी करने के निर्णय को विश्वासघात बताया। उन्होंने कहा कि सभी इसके विरोध में खड़े हैं। उनको आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाए बिना बहुत साारे काम थोंपे गए हैं तथा पदोन्नति प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ रही है।

कहा कि राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए समिति का गठन किया था, लेकिन उसके बाद भी समस्याओं का निपटारा नहीं हुआ।

ऐसे में यदि सरकार उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करना चाहती है तो कर ले। उन्होंने कहा कि अप्रैल में 250 पद पटवारियों के और खाली होने हैं और इतने ही पटवारी-कानूनगो पदोन्नत होने हैं।

स्टेट कैडर का निर्णय स्वीकार्य नहीं : चौधरी

हिमाचल प्रदेश संयुक्त पटवारी एवं कानूनगो महासंघ के राज्य प्रधान सतीश चौधरी ने बताया कि बैठक में सभी पदाधिकारियों ने साफ तौर पर कहा कि उनको स्टेट कैडर का निर्णय स्वीकार्य नहीं है।

इसके बावजूद वह सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार है। सरकार को उनकी जायज मांगों को गंभीरता से लेना चाहिए। यदि सरकार ऐसा नहीं करती तो उनके पास आंदोलन पर जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।

राजस्व अधिकारी संघ ने किया समर्थन

हिमाचल प्रदेश राजस्व अधिकारी संघ ने पटवारी-कानूनगो की मांगों का समर्थन किया है। संघ के अध्यक्ष नारायण सिंह वर्मा एवं महासचिव विपिन वर्मा ने सरकार से उनकी मांगों का शीघ्र निवारण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पटवारी-कानूनगो को स्टेट कैडर बनाने संबंधी निर्णय भर्ती एवं पदोन्नति नियम बनाने के बाद लेना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि शेरशाह सूरी के समय से करीब 500 वर्ष से चल रहा राजस्व विभाग सरकार की रीढ़ है, जिसकी भूमि रिकॉर्ड का रखरखाव, सीमांकन, राजस्व संग्रह और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने कहा कि पटवारी-कानूनगो के ऊपर वर्तमान समय में काम का अत्यधिक बोझ होने के बावजूद उसके अनुरूप सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। सरकार को पहले समिति की सिफारिशों को शीघ्र लागू करना चाहिए।

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