कुल्लू, धर्मचंद यादव : एक जमाना था जब कुल्लू घाटी पूरे विश्व में प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध थी। देश-विदेश से सैलानियों के साथ-साथ नामी गिरामी हस्तियां भी यहां पर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए आया करती हैं। लेकिन उसके बाद एक दौर वह भी आया कि यही कुल्लू घाटी पूरे विश्व में काला सोना यानी चरस के लिए बदनाम हो गई। कुल्लू घाटी में अंतरराष्ट्रीय स्तर के चरस तस्करों ने अपना नेटवर्क बिछाया रखा है।

हालांकि पूर्व में रहे जिला के पुलिस अधिकारियों ने चरस तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने का भरसक प्रयास किये हैं। लेकिन इसके बावजूद भी चरस तस्करी का धंधा कुल्लू जिला में बेरोकटोक आज भी जारी है। हालांकि हर साल पुलिस सैंकड़ों बीघा भूमि से भांग उखाड़ने का दावा करती है। लेकिन उसके बावजूद भी जिला में भांग की खेती और चरस की तस्करी में कोई फर्क नहीं आया है।
लेकिन अब कुल्लू घाटी हेरोइन यानी चिट्टा तस्करी के लिए बदनाम होने लगी है। खास बात यह है कि चरस माफिया के लोग चरस कुल्लू से बाहर ज्यादातर दूसरे राज्यों को सप्लाई करते हैं। जबकि चिट्टा तस्कर दूसरे राज्यों से चिट्टा कुल्लू जिला के लिए सप्लाई कर रहे हैं।
चिट्टा तस्करों ने कुल्लू घाटी को पूरी तरह से अपने मक्कड़जाल में फांस लिया है। जिसकी वजह से खासतौर पर युवा पीढ़ी इस जानलेवा नशे का शिकार होती जा रही है। बड़ी संख्या में जिला के युवक और युवतियां चिट्टे का जानलेवा नशा करने लगे हैं। उसी का परिणाम है कि जिला में चोरियों के मामले भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

फिलहाल जिस तरह से चरस तस्करों के साथ-साथ चिट्टा तस्करों ने कुल्लू जिला में अपना जाल बिछाया है, वह निश्चित तौर पर आने वाले समय में समाज के लिए एक गंभीर समस्या उभर कर सामने आएगी। हालांकि पुलिस थाना चौकियों के कर्मचारी चरस व चिट्टा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करते आ रहे हैं। लेकिन जिला के आला पुलिस अधिकारी इस समस्या की तरफ से पूरी तरह आंख मूंदे हुए अपने शौक पूरे करने में मस्त हैं।
गौरतलब है कि कुल्लू जिला का प्रवेश द्वार भुंतर चिट्टा तस्करों का प्रमुख अड्डा बना हुआ है। जहां से तस्कर पूरे जिले को चिट्टा सप्लाई करते हैं। दूसरे राज्यों चिट्टा ले जाने वाले तस्करों की स्थानीय सप्लायरों के साथ वहीं पर अधिकतर डील होती है।
इसके साथ ही धार्मिक पर्यटन नगरी मणिकर्ण घाटी में स्थित मिनी इजरायल के नाम से प्रसिद्ध कसोल उत्तरी भारत के चिट्टा तस्करों का हब बन गया है। जहां पर चरस व चिट्टे के अलावा हर तरह का सिंथेटिक ड्रग उपलब्ध होता है। इसी के साथ जिला मुख्यालय कुल्लू में भी चिट्टा तस्कर पूरी तरह से सक्रिय है।

जबकि कुल्लू से मनाली तक रायसन, पतलीकूहल, कटराई सहित विश्वविख्यात पर्यटन नगरी मनाली पूरी तरह से चिट्टा तस्करों के शिकंजे में है। युवा वर्ग बड़ी संख्या में चिट्टा तस्करी के साथ-साथ उसके सेवन में भी अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं।
हैरत इस बात की है कि जिला के आला पुलिस अधिकारी इस समस्या के प्रति कतई गंभीर नहीं हैं। जबकि चिट्टा तस्कर लगातार जिला में अपने पांव पसारते जा रहे हैं। पुलिस के आला अधिकारी अपने शौक पूरे करने में मस्त है। उनकी तरफ से थाना चौकियों में तैनात पुलिस कर्मचारियों को किसी भी तरह का मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है। जिसकी वजह से उनमें भी बड़े अधिकारियों के प्रति भारी निराशा देखने को मिल रही है। हालांकि थाना चौकियों में तैनात प्रभारी व अन्य कर्मचारी लगातार नशा तस्करों की धर पकड़ में लगे रहते हैं।
अहम बात यह है कि नशा तस्करों की कमर तोड़ने के लिए आला अधिकारियों की योजना और उनका मार्गदर्शन निचले स्तर के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए बेहद आवश्यक रहता है। इसीलिए जिला में बड़े अधिकारियों के तैनाती की जाती है। लेकिन कुल्लू जिला के बड़े साहब अपने खेल व नृत्य के शौक को पूरा करने को ज्यादा अहमियत देते हैं। जिसके लिये वह वर्दी में नेताओं संग मंच पर लोगों के सामने नृत्य करने लग जाते हैं तो कभी कुल्लू से अन्य जिलों के अलावा राज्य से बाहर तक हो आते हैं। लेकिन अपने जिला में क्या चल रहा है, उसकी उन्हें कोई फिक्र नहीं रहती है।

अहम बात तो यह है कि चरस व चिट्टा तस्करों की लगातार बढ़ती गतिविधियों के साथ ही जिला में हत्याओं का सिलसिला भी लगातार बढ़ता जा रहा है। इस साल के प्रारंभ में ही जिला में तीन हत्याएं होना पुलिस अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े करते हैं। अभी तक उन मामलों में भी पुलिस लगभग खाली हाथ है। थाना चौकियों के कर्मचारी हत्यारोपियों की धर पकड़ में लगे हैं। लेकिन आला अधिकारी इस मामले में पूरी तरह से खामोशी धारण किये हुए है।
मगर जब थाना चौकी के पुलिस कर्मचारी अपराधियों को पकड़ लेते हैं, तो आला अधिकारी मीडिया में बयान बाजी करने के साथ ही तस्वीरें खिंचवाने के लिए आगे हो जाते हैं। लेकिन इस तरह के मामलों को हल करने के लिए उनके किसी भी तरह के दिशा निर्देश उन्हें नहीं मिल पा रहे हैं।
फिलहाल जिस तरह से कुल्लू घाटी चरस के बाद चिट्टा तस्करी के लिए बदनाम होती जा रही है, वह बेहद चिंता का विषय है। चिट्टा तस्कर लगातार युवा पीढ़ी को निशाना बनाते हुए उन्हें नशेड़ी बनाते जा रहे हैं। जिससे कुल्लू घाटी के युवा अपने भविष्य के प्रति ध्यान न देकर नशे की गर्त में जीवन बर्बाद कर रहे हैं। हालांकि नशा तस्करों के खिलाफ समाज के हर वर्ग को भी आगे आना पड़ेगा। तभी वह युवा पीढ़ी के साथ-साथ अपने बच्चों को भी मौत के कुंएं में जाने से बचा पाएंगे।
मगर जिस तरह से पुलिस की आलाधिकारी इस मामले को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं। उस लोगों में भी उनके प्रति आक्रोश व निराशा पनपती जा रही है।

अब लोग दबी जुबान में कहने लगे हैं कि कुल्लू जिला पुलिस के आला अधिकारियों को तब्दील करके अन्य पुलिस अधिकारियों को यहां पर तैनात किया जाना चाहिए। ताकि लगातार बढ़ती नशा तस्करों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के साथ-साथ उनके खिलाफ करवाई भी हो सके। इसके साथ ही लोग पूर्व में एसपी रहे गौरव सिंह को बड़ी शिद्दत से याद करने लगे हैं।
इस लिये याद आते हैं गौरव सिंह
पूर्व में कुल्लू के एसपी रहे गौरव सिंह लोगों को बहुत याद आने लगे हैं। क्योंकि उनके कार्यकाल में जिला में नशा तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिये ताबड़तोड़ कार्रवाई होती रही। कुल्लू को चिट्टे की सप्लाई देने वाले दूसरे राज्यों के सप्लायर मंडी से आगे आने की हिम्मत नहीं कर पाते थे। स्थानीय तस्करों ने भी लगभग धंधा बंद कर दिया था। लोग सकून महसूस करते थे। लेकिन अब स्थितियां बिल्कुल विपरीत हो गई हैं।