करंट न्यूज ब्यूरो
आनी (कुल्लू)
कम्प्यूटर शिक्षक बिना वेतन की अदायगी के कोरोना वैक्सिनेशन का कार्य निभा रहे हैं। आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रदेश सलाहकार धनपत भारद्वाज ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने पिछली कैबिनेट में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए कोरोना ड्यूटी के दौरान 200 रु प्रति सेशन देने की बात कही थी। लेकिन मांग है कि इस फण्ड को 200 से बढ़ाकर 500 किया जाए।
उनका कहना है कि कोरोना वैक्सीनेशन कार्य के दौरान यदि किसी आउटसोर्सिंग कर्मचारी के साथ कोई हादसा घटित होता है। तो ऐसे में उसके परिवार को सहारे के रूप में कोई नीति अमल में लाई जाएं।
मांग की है कि सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों को सम्बंधित विभाग में समायोजन करें। वहीं सरकारी स्कूलों में तैनात 1341 कंप्यूटर शिक्षकों को कोरोना काल मे पिछले एक महीने से वेतन नहीं मिला है।
शिक्षकों को प्रतिमाह दो करोड़ रुपये का वेतन देने के लिए शिक्षा विभाग और नाइलेट संस्था शिक्षको को वेतन देने के लिये देती है लेकिन इसमें भी लगातार हर माह देरी की जा रही है। नाइलेट वेतन की अदायगी करने में हर माह आनाकानी कर रहा है।
संघ के सलाहकार धनपत भारद्वाज का कहना है कि हर बार शिक्षकों को शिक्षा सचिव के हस्तक्षेप के बाद फंड जारी किया जाता है। सूबे के सरकारी स्कूलों में आउटसोर्सिंग पर कंप्यूटर शिक्षक नियुक्त हैं।
बताया कि नाइलेट कंपनी के माध्यम से शिक्षकों को नियुक्त किया गया है। सरकार शिक्षकों को वेतन देने के लिए नाइलेट कंपनी को अदायगी करती है।
शिक्षा विभाग नाइलेट कंपनी को सरकार से पैसा आने के बाद कंपनी शिक्षकों को वेतन देती है। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते अभी तक कंप्यूटर शिक्षकों को दिए जाने वाले वेतन का अदायगी नही हो पाई है।