नई दिल्ली | करंट न्यूज़: कसोल रेव पार्टी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को *आंशिक राहत* दी है। कोर्ट ने *FIR और SIT गठन के आदेश पर रोक लगा दी*, लेकिन *डीसी, एसपी व एसडीएम के तबादले वाले आदेश को बरकरार रखा* है।
*तबादले पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख*
सुप्रीम कोर्ट की *सीजेआई सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना* की पीठ ने साफ कहा कि *अधिकारी अपने तबादले का विरोध नहीं कर सकते*।
इसलिए पीठ ने *हाईकोर्ट के उस हिस्से पर रोक लगाने से इनकार कर दिया* जिसमें कुल्लू के *डीसी अनुराग चंद्र शर्मा व एसपी मदन लाल तथा एसडीएम निशांत ठाकुर* का राज्य के अन्य जिलों में तबादला करने को कहा गया था।
पीठ ने टिप्पणी की कि *तबादला प्रशासनिक मामला है* और इस पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
*FIR और SIT पर लगी रोक*

हालांकि कोर्ट ने हिमाचल सरकार और अधिकारियों को *बड़ी राहत* देते हुए *हाईकोर्ट के अन्य आदेशों पर रोक* लगा दी।
अब अगली सुनवाई तक *अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं होगी*। *DIG स्तर के अधिकारी की निगरानी में SIT नहीं बनेगी*।
*हाईकोर्ट ने क्या कहा था?*
*24 जून 2026* को हिमाचल हाईकोर्ट ने कुल्लू में बड़े पैमाने पर रेव पार्टियों और *जिला अधिकारियों की कथित मिलीभगत* का संज्ञान लिया था। कोर्ट ने 3 वरिष्ठ अधिकारियों के *तबादले, FIR और SIT गठन* के आदेश दिए थे।

हाईकोर्ट ने कहा था कि *रेव पार्टियों* की अनुमति देने में अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है।
*सरकार ने क्या दलील दी?*
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता *माधवी दीवान* ने कहा कि अधिकारियों का *बिना सुनवाई तबादला* करना, FIR और SIT से उनकी *छवि खराब* होगी। उन्होंने यह भी कहा कि आयोजकों के पास *शराब का लाइसेंस* था और उन पर कोई अवैध काम का आरोप नहीं है।
*अगली सुनवाई*
मामले की *अगली सुनवाई हिमाचल हाईकोर्ट में 6 अगस्त* को होगी। तब तक हाईकोर्ट के आदेश का सिर्फ तबादले वाला हिस्सा लागू रहेगा। माना जा रहा है कि अब सरकार को तीनों अधिकारियों के तबादला आदेश करने पड़ेंगे।