नई दिल्ली | करंट न्यूज़: कसोल में अवैध रेव पार्टियों और नशे के मामले में हिमाचल प्रदेश सरकार और कुल्लू के तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों को *सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत* मिली है।
सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें कुल्लू के तत्कालीन *डीसी, एसपी और संबंधित एसडीएम* के खिलाफ *FIR दर्ज करने, SIT बनाने और विभागीय कार्रवाई* शुरू करने को कहा गया था।
*सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?*
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि *अगली सुनवाई तक हाईकोर्ट के आदेश पर कोई कार्रवाई नहीं होगी*। कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों से जवाब भी मांगा है।
यह अंतरिम राहत *हिमाचल सरकार और प्रभावित अधिकारियों* की उस याचिका पर मिली है, जिसमें उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।
*हाईकोर्ट ने क्यों दिए थे कड़े आदेश?*
इससे पहले हिमाचल हाईकोर्ट ने पार्वती घाटी में बढ़ रही अवैध रेव पार्टियों, नशीले पदार्थों के खुलेआम इस्तेमाल और *प्रशासनिक लापरवाही* पर सख्त टिप्पणी की थी।

अदालत ने कहा था कि *जिला प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रहा है*। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे।
1. *कुल्लू के डीसी, एसपी और एसडीएम का तबादला*
2. *उनके खिलाफ FIR दर्ज करना*
3. *DIG स्तर के अधिकारी की निगरानी में SIT का गठन*
4 *विभागीय कार्रवाई शुरू करना*
*मामला सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचा?*
हाईकोर्ट के इन निर्देशों को सरकार और अधिकारियों ने *सुप्रीम कोर्ट में चुनौती* दी। याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट के आदेश के कई पहलुओं पर *कानूनी समीक्षा* जरूरी है।

प्रारंभिक सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने *हाईकोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक* लगाते हुए मामले की विस्तृत सुनवाई का फैसला किया।
*आगे क्या?*
सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले तक *हाईकोर्ट के विवादित निर्देश प्रभावी नहीं रहेंगे*। अब कोर्ट सभी पक्षों के जवाब और दलीलें सुनने के बाद अंतिम निर्णय सुनाएगा।
फिलहाल यह अंतरिम रोक *हिमाचल सरकार और कुल्लू प्रशासन* के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।