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कुल्लू, करंट न्यूज़ : रविवार सुबह कुल्लू जिला के बंजार उपमंडल के तहत नोहांडा गांव में भयंकर आग लगने से पूरे गांव के कई रिहायशी मकान जलकर राख हो गए।

बताया जा रहा है कि आग इतनी भीषण थी कि कुछ ही मिनटों में लकड़ी के बने पारंपरिक घर आग की लपटों में समा गए। सुखद यह रहा कि समय रहते ग्रामीण घरों से बाहर निकल आए और किसी तरह जनहानि नहीं हुई। लेकिन करीब 20 से अधिक मकान पूरी तरह नष्ट हो गए।

कैसे लगी आग

स्थानीय लोगों के मुताबिक सुबह अचानक एक घर से धुआं उठता दिखा। देखते ही देखते तेज़ हवा के कारण लपटें पास के घरों तक पहुँच गईं। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि आग शॉर्ट सर्किट या रसोई के चूल्हे से फैली होगी। गांव के मकान लकड़ी के बने होने से आग ने बेहद तेज़ी से फैलाव लिया।

दमकल विभाग की कठिन लड़ाई

आग की सूचना मिलते ही बंजार और जिभी से दमकल की गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। हालांकि पहाड़ी इलाकों की संकरी गलियों और ऊँचाई वाले रास्तों के कारण आग पर काबू पाने में काफी मुश्किल हुई। ग्रामीणों ने बाल्टियों, पाइपों और बर्फ पिघला कर पानी डालते हुए बचाव कार्य में दमकल कर्मियों की मदद की।

प्रशासन की कार्रवाई व राहत कार्य

घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम बंजार और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। प्रशासन ने तत्काल राहत के तौर पर खाद्य सामग्री, कंबल, तिरपाल और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था की है।

डीसी कुल्लू ने तोरुल एस रविश ने कहा कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है और पीड़ित परिवारों को राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) से सहायता प्रदान की जाएगी।

ग्रामीणों की पीड़ा

स्थानीय निवासी बताते हैं कि इस ठंडे मौसम में घर जल जाने के बाद वे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।उन्होंने सरकार से जल्द मुआवज़ा और पुनर्वास की मांग की है।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बंजार क्षेत्र में कई बार इस तरह की आग लग चुकी है, इसलिए स्थायी अग्नि-सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है।

दुर्गम गांव में हुआ हादसा

नोहांडा गांव बंजार उपमंडल के तहत गुशेनी के दुर्गम इलाके में बसा है। यहां घर पारंपरिक काठ-कुणी शैली में बने होते हैं, जिनमें लकड़ी और पत्थर का उपयोग होता है। यह आग लगने पर बेहद संवेदनशील माने जाते हैं।

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